दैनिक भास्कर ऐप की खबर का बड़ा असर हुआ है। लेपर्ड-टाइगर को मारकर उनकी खाल और अंग बेचने वाले खूंखार शिकारियों के गिरोह को टीम ने लंबी पड़ताल के बाद बेनकाब किया था। खबर प्रकाशित होने के 24 घंटे के भीतर पुलिस और वन विभाग की टीम ने इन तीनों को गिरफ्तार कर
गिरफ्तार आरोपियों में लेपर्ड का शिकार करने वाला सांड मंगरा रायपुर ब्यावर निवासी प्रतापसिंह, आमा का वाड़िया भीम निवासी दलाल शंकरसिंह और गणेशसिंह हैं। शंकरसिंह और प्रतापसिंह आपस में जीजा-साला हैं। वहीं दलाल गणेशसिंह शंकरसिंह के गांव का ही रहने वाला है।

45 दिन की पड़ताल के बाद किया था एक्सपोज जंगलों से लगातार गायब हो रहे लेपर्ड-टाइगर को मारने वाले शिकारियों की गैंग तक पहुंचने में 45 दिन लगे थे। तस्करों ने सबसे पहले रिपोर्टर को रायपुर क्षेत्र में बुलाया था। वहां खाल बिक जाने का बहाना कर दिया। इसके बाद इन तस्करों ने खाल दिखाने के लिए भीम बुलाया। यहां इन तस्करों ने दो दिन में रिपोर्टर को लेपर्ड की दो खाल दिखाई, जिनकी कीमत 5 से 7 लाख बताई।
बताया कि कैसे लेपर्ड का गोली मारकर बेरहमी से शिकार किया और खाल व अंग निकाले। शिकारी सबसे ताकतवर जानवर टाइगर की खाल तक उपलब्ध कराने को तैयार थे। इस डील के दौरान रिपोर्टर ने शिकारी और दलालों के चेहरों को अपने कैमरे में कैद कर लिया था। 24 घंटे में छापेमारी कर रायपुर थाना पुलिस और वन विभाग की टीम ने तीनों को गिरफ्तार किया है। इसके बाद इनकी असली पहचान सामने आई है।

शिकारी नंबर-1 शंकरसिंह, दलाल गणेश (बीच में) और शिकारी नंबर-2 प्रतापसिंह है। प्रतापसिंह ने ही दोनों लेपर्ड का शिकार किया था।
अब जानिए शिकार से लेकर गिरोह तक पहुंचने की पूरी कहानी
प्रतापसिंह ने किया था लेपर्ड का शिकार पुलिस पूछताछ में सामने आया कि लेपर्ड का शिकार प्रतापसिंह ने अपने गांव सांड मंगरा क्षेत्र के जंगलों में किया था। प्रतापसिंह जंगल में अपनी बकरियों को चराने जाता था। वहां एक लेपर्ड ने उनकी बकरी को मार दिया था। इसके बाद प्रतापसिंह ने जंगल में दो लेपर्ड को गोली मार दी थी। प्रतापसिंह यह जानता था कि लेपर्ड की खाल, दांत और नाखून काफी महंगे बिकते हैं। ऐसे में उसने जंगल में ही दोनों लेपर्ड की खाल और अन्य अंगों को निकाल दिया।

शंकरसिंह और गणेश ढूंढ रहे थे ग्राहक प्रतापसिंह ने लेपर्ड के शिकार के बाद अपने जीजा शंकरसिंह को उसे बिकवाने के लिए कहा था। इस पर शंकरसिंह ने भीम में चाय की होटल चलाने वाले गणेशसिंह को इसकी जिम्मेदारी दे रखी थी। गणेश कई लोगों से खाल बिकवाने के लिए संपर्क कर रहा था। सूत्रों से इसकी जानकारी लगते ही भास्कर टीम दलाल बनकर गिरोह तक पहुंची।

पहले भी कई ग्राहकों को दिखाई थी खाल तीनों तस्कर लेपर्ड की खाल को अच्छे भाव में बेचना चाहते थे। इसी के चलते तीनों कई और ग्राहकों को भी खाल और दूसरे अंग दिखा चुके थे। लेकिन रेट काफी ज्यादा होने से कोई खरीदार नहीं मिला।

वन विभाग की खामियों के थे पूरे जानकार प्रतापसिंह, शंकर और गणेश तीनों ही वन विभाग की हर हरकत के जानकार थे। तीनों के गांव भी वन विभाग की चौकियों के आसपास ही हैं। जानते थे कि वन विभाग के कर्मचारी कहां तक गश्त करते हैं। इसी का फायदा उठाकर प्रतापसिंह दिन में बंदूक लेकर जंगल में गया था। उसने दो लेपर्ड का शिकार कर लिया था। चौंकाने वाली बात यह है कि वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।

तस्करों ने लेपर्ड की जो खाल दिखाई… यह उसका वीडियो है।
खबर लगते ही सभी हो गए थे फरार भीम सीओ पारस चौधरी ने बताया- खबर पब्लिश होते ही सभी अपने ठिकानों से फरार हो गए थे। ऐसे में पुलिस ने सबसे पहले बुधवार को दलाल गणेश की लोकेशन निकालकर शिकंजा कसा। गणेश अपनी चाय की होटल बंद कर गायब था। उसे भीम के बाहर एक खेत से पकड़ा।
फिर गणेश की मदद से ही शंकरसिंह को उसके गांव आमा का वाड़िया के बाहर खेत से पकड़ा। दोनों से पूछताछ में सामने आया कि लेपर्ड की खाल शंकर के साले प्रतापसिंह के पास है।
इसके बाद भीम थाना पुलिस की एक टीम शंकरसिंह के बताए अनुसार प्रतापसिंह के गांव सांड मंगरा भेजी। वहां प्रतापसिंह गांव के बाहर अपने बाड़े में छिपा हुआ था। पुलिस ने उसे वहां से पकड़ लिया। उसकी निशानदेही पर खेत में छिपाई हुई लेपर्ड की 2 खाल भी बरामद कर ली गई।
पढ़िए- लेपर्ड-टाइगर के शिकारियों की इन्वेस्टिगेशन स्टोरी
लेपर्ड-टाइगर मारकर, खाल और अंगों की दलाली:कीमत 5 से 10 लाख, मूंछ के बाल तक का सौदा, भास्कर के कैमरे में खूंखार शिकारी

लेपर्ड हो या टाइगर, ऑर्डर मिलते ही शिकार करेंगे…ताजा खाल से लेकर दांत, नाखून उतारकर सब कुछ बेच देंगे। दैनिक भास्कर ने ऐसे ही खतरनाक शिकारियों और वन्यजीवों के अंगों और खाल की तस्करी करने वाले रैकेट को कैमरे पर एक्सपोज किया। करीब 45 दिन की पड़ताल के बाद टीम शिकारियों की गैंग तक पहुंची…(CLICK कर पूरा पढ़ें)
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments