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कोटा के टीलेश्वर महादेव मंदिर में आयुर्वेद का शिविर लगाया गया। कैंप में 40 आयुर्वेद डॉक्टर ने मरीजों का पुरानी पद्धति से निशुल्क इलाज किया। इस शिविर में आधुनिक कंप्यूटराइज मशीन नाड़ी तरंगिणी द्वारा प्रत्येक मरीज का नाड़ी परीक्षण किया गया। अग्निकर्म पंच
जोधपुर आयुर्वेद विश्वविद्यालय से आए अग्निकर्म एवं पंचकर्म विशेषज्ञ डॉक्टर चंद्रेश तिवारी ने पंचकर्म व अग्निकर्म से शिविर में आने वाले मरीजों के कमर दर्द, घुटने दर्द, माइग्रेन, सिर दर्द, स्लिप डिस्क, AVN, साइटिका,चमड़ी में होने वाले मस्से का इलाज किया।
डॉ चन्द्रेश तिवारी ने बताया कि आयुर्वेद में आचार्य सुश्रुत द्वारा प्रदत्त अग्निकर्म चिकित्सा वहाँ भी काम करती है। जहां ओषधि एवं शल्य चिकित्सा भी काम नहीं करती है।
दिल्ली से आए आयुर्वेद डॉक्टर रवि गोगिया ने बताया कि यहां आने वाले मरीजों का विद्धकर्म करके मरीजों का इलाज किया गया। शरीर में होने वाले दर्द को विद्धकर्म के जरिए सही किया गया। विद्धकर्म में हम दर्द वाली जगह पर नीडल लगते हैं और उसे 30 सेकंड तक छोड़ते हैं। यह पद्धति एक्यूपंक्चर से मेल खाती है दोनों में सेम प्रक्रिया होती है। उसमें समय ज्यादा लगता है और इसमें मात्र 30 सेकंड में काम हो जाता है।
डॉ के सी नंदवाना शिविर इंचार्ज ने बताया कि शिविर का आयोजन सुबह 9 बजे से शुरू किया गया जो शाम 6 बजे तक चला। एक हजार लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था लेकिन 1300 मरीजों का इलाज किया गया। सभी मरीजों की पुरानी पद्धति से थेरेपी की गई और निशुल्क दवाइयां भी वितरण की गई राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर दिल्ली और भी कई जगह के डॉक्टर ने इस शिविर में हिस्सा लिया। इस शिविर का आयोजन दूसरी बार किया जा रहा है जो की चरणजीत खुराना की तरफ से करवाया गया। इसमें व्यास आयुर्वेद फार्मा ने योगदान किया।
डॉक्टर के सी नंदवाना ने बताया कि शिविर में डॉ चंद्रेश तिवारीअग्निकर्म व पंचकर्म विशेषज्ञ राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर, डॉ शहादत खान शिशु रोग विशेषज्ञ, डॉ कौशल सामरिया शिशु रोग विशेषज्ञ,डॉ रामहेत नागर काय चिकित्सा विशेषज्ञ, डॉ मिथलेश जैन जीर्णरोग रोग विशेषज्ञ , डॉ हेमेंद्र वर्मा मर्म चिकित्सा विशेषज्ञ , डॉ श्रीराम (जालौर) डॉ प्रद्युम्न भारद्वाज , डॉ माणकचंद गोड़ , डॉ अश्विन रोहिल्ला, डॉ योगराज आर्य (देहली) डॉ ललित व्यास(व्यास फार्मा ) इसी तरह 40 आयुर्वेद डॉक्टर ने आज मरीजों का इलाज किया।
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