कोटा के संभाग के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु अस्पताल जेके लोन से लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल में भर्ती नवजात शिशुओं को 2-डी ईको जांच के लिए निजी सेंटर भेजा जा रहा है। जबकि न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल व एसएसबी में ये सुविधा है।

अस्पताल में भर्ती नवजात शिशुओं को 2-डी ईको जांच के लिए निजी सेंटर भेजा
हालात यह हैं कि रेजीडेंट डॉक्टर खुद परिजनों के साथ नवजातों को गोद में लेकर सड़क पार कराते हुए ट्रैफिक के बीच से निजी सेंटर तक पहुंचाते हैं। गुरुवार दोपहर भी पांच बच्चों को ऐसे ही जांच के लिए ले जाया गया। इनमें से एक बच्चा ऑक्सीजन सपोर्ट पर था, जिसे सिलेंडर के साथ सड़क पार कराते हुए निजी सेंटर तक पहुंचाया गया। यहां सवाल उठता है कि जब मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग में 2-डी ईको जांच की सुविधा पहले से मौजूद है, तो नवजातों को निजी सेंटर क्यों भेजा जा रहा है? संक्रमण के खतरे और हादसे की आशंका को देखते हुए यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।
मामले में जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा ने कहा कि हमारे अस्पताल से नवजातों को निजी सेंटर भेजना संभव ही नहीं है। आमतौर पर बच्चों को एमबीएस या एसएसबी अस्पताल ले जाया जाता है और इसके लिए बाकायदा एंबुलेंस की व्यवस्था होती है। उन्होंने इस मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है और शिशु रोग विभाग के एचओडी से रिपोर्ट मांगी है।
वहीं शिशु रोग विभाग एचओडी डॉ.अमृतलाल बैरवा ने भी इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो भी जिम्मेदार है, उसके खिलाफ ठोस एक्शन लिया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकरसवाल खड़े हो रहे हैं
1. जब सरकारी अस्पताल में जांच सुविधा उपलब्ध है तो निजी सेंटर क्यों?
2. नवजात को सड़क पर ले जाते समय संक्रमण का खतरा कौन उठाएगा?
3. ट्रैफिक के बीच हादसा हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा?
सरकार जहां करोड़ों का बजट जारी कर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं जेके लोन अस्पताल का यह मामला सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है।
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