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राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में अब 101 की जगह 145 तरह की जांच मुफ्त में होगी। इसमें कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, सैक्सुअल डिजीज, हार्ट डिजीज और पेट की गंभीर बीमारियों की एडवांस जांच भी मरीज करवा सकेंगे। प्राइवेट लैब पर इन जांचों के लिए हजारों रुपए खर्च क

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इसके साथ ही घर के नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और डिस्पेंसरी पर भी 15 की जगह 66 तरह की जांच मुफ्त में होगी। पहले खून की सामान्य जांचें ही हो पाती थीं। जांच की रिपोर्ट भी मरीज ऑनलाइन डाउनलोड कर पाएंगे।

इस सुविधा के लिए राजस्थान के 1512 अस्पतालों में सरकार लैब जांच का ‘मदर-हब-स्पोक’ मॉडल लागू करने जा रही है।

यह मॉडल क्या है?

इससे आम मरीजों को कितना फायदा मिलेगा?

कौन-कौन से हॉस्पिटल में कितने तरह की जांचें मुफ्त में होंगी?

यह सुविधा कब से मिलनी शुरू होगी?

इन सब सवालों के जवाब मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए…

मदर, हब एवं स्पोक मॉडल है क्या? मदर, हब और स्पोक मॉडल जांच की अलग-अलग सुविधाओं के अनुसार बनाया गया है। जिले की सबसे बड़ी इकाई को मदर लैब कहा गया है। उप-जिला स्तर की छोटी इकाई को हब और तहसील या ब्लॉक स्तर की सबसे छोटी इकाई को स्पोक कहा गया है।

  • जिला अस्पताल, उप जिला अस्पताल और सैटेलाइट अस्पताल : पहले लैब में 56 जांचें होती थी, अब इन्हें मदर लैब में कन्वर्ट करते हुए 145 तरह की जांचे फ्री में होंगी।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) : पहले 37 प्रकार के टेस्ट होते थे, अब इन्हें हब लैब में कन्वर्ट करते हुए 101 तरह के टेस्ट हो पाएंगे।
  • प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी)/ डिस्पेंसरी : 15 तरह की सामान्य जांच होती थी। अब इन्हें स्पोक लैब बनाते हुए 66 तरह की जांच की सुविधा मिलेगी।

US से सर्टिफाइड होंगी लैब जन स्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा बताते हैं- हाल ही में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की मौजूदगी में एमओयू साइन किया है। सेवा प्रदाता द्वारा मदर लैब एवं हब लैब में यूएसएफडीए, यूरोपियन सीई सर्टिफाइड उपकरण स्थापित किए जाएंगे। इन लैब में काम आने वाली सभी दवाएं और वर्कर सेवा प्रदाता कंपनी ही उपलब्ध करवाएगी। सैंपल कलेक्शन से लेकर क्वालिटी चेक और रिपोर्टिंग तक सभी कार्यों का रिकॉर्ड नियमित रूप से ‘लेबोरेटरी इनफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम’ के माध्यम से ऑनलाइन किया जाएगा। मरीजों को घर बैठे ऑनलाइन रिपोर्ट उपलब्ध हो सकेगी। इस मॉडल को अपनाने से जांचों की गुणवत्ता में सुधार होगा।

इस तरह से 145 जांचों की पूरी लिस्ट तैयार की गई है।

इस तरह से 145 जांचों की पूरी लिस्ट तैयार की गई है।

प्राथमिक हेल्थ सेंटर्स पर भी HIV और कैंसर की जांच पीएचसी और डिस्पेंसरी पर अब तक खून की सामान्य जांच हो पाती थी। अब गंभीर रोगों की जांच संभव हो पाएंगी। इनमें सर्वाइकल कैंसर, कॉलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, एचआईवी, सिकल सेल एनिमिया, डिप्थीरिया, थायराइड, यूरिन कम्प्लीट प्रोफाइल के अलावा किडनी और लिवर से जुडे़ रोगों की भी जांच हो पाएगी।

  • इसी तरह सीएचसी स्तर पर 101 तरह की जांचें होंगी, इनमें सेक्सुअल डिजीज, हार्ट से जुड़े रोगों समेत अन्य एडवांस जांचें संभव हो पाएंगी।
  • जिला अस्पतालों, उपजिला अस्पतालों और सैटेलाइट अस्पतालों में कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, गेस्ट्रिक प्रॉब्लम समेत गंभीर बीमारियों के एडवांस जांचे हो पाएंगी।

जहां सुविधा नहीं, वहां से सैंपल भेजकर कराएंगे जांच स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक- मान लीजिए किसी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की लैब में कोई विशेष जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो वहां से मरीज का सैंपल लेकर हब लैब में भेजा जाएंगे। इसी तरह हब लैब में जिस जांच की सुविधा नहीं होगी, वहां से मरीज के सैंपल को मदर लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। पहले मरीजों को जांच सुविधा नहीं होने के चलते खुद बड़े हॉस्पिटल में भटकना पड़ता था।

सवाल : राजस्थान में कितनी लैब बनाई जाएंगी? जवाब : इस मॉडल को लागू करने के बाद प्रदेशभर में 42 मदर लैब,135 हब लैब और 1335 स्पोक लैब बनाई जाएंगी।

सवाल : इस योजना के तहत मरीजों को सुविधाएं कब से मिलनी शुरू हो जाएंगी? जवाब : जिस कंपनी को काम सौंपा गया है, उसे तीन महीने में ही सभी जांच सुविधा शुरू करने का समय दिया गया है। एग्रीमेंट के तहत कंपनी तीन महीने के भीतर ही सभी जगह लैब ऑपरेट करेगी। अनुमान है इस बार दीपावली के आस-पास ज्यादातर लैब में काम शुरू हो जाएगा।

सवाल : घर बैठे लैब की रिपोर्ट कैसे मिलेगी, इसके लिए क्या प्रोसेस अपनाया जाएगा? जवाब : लैब से जांच रिपोर्ट चार तरह से मिलेगी।

जांच कराने आने वाले मरीज को अपना मोबाइल नंबर देना होगा। उस मोबाइल नंबर को लैब संचालक ऑनलाइन रजिस्टर करेगा। रिपोर्ट तैयार होने के बाद मरीज के मोबाइल पर मैसेज के जरिए लिंक मिलेगा। ओटीपी डालकर रिपोर्ट निकाली जा सकेगी।

  • मोबाइल पर वॉट्सऐप के जरिए भी रिपोर्ट भेज दी जाएगी।
  • मरीज हॉस्पिटल की लैब में जाकर निर्धारित समय पर रिपोर्ट ले सकता है।
  • जिस डॉक्टर ने टेस्ट लिखे हैं, वे भी अपने सिस्टम से जांच रिपोर्ट ऑनलाइन ही देख सकेंगे।
अपने सिस्टम के जरिए लैब संचालक रिपोर्ट डाउनलोड करने का लिंक ऑनलाइन भेजेंगे।

अपने सिस्टम के जरिए लैब संचालक रिपोर्ट डाउनलोड करने का लिंक ऑनलाइन भेजेंगे।

सवाल : राजस्थान में कितनी पीएचसी, कितनी सीएचसी, कितने जिला अस्पतालों, सैटेलाइट अस्पतालों में यह सुविधा होगी? जवाब : राजस्थान में कुल 63 जिला अस्पताल, 107 उप जिला अस्पताल और 28 सैटेलाइट अस्पताल हैं। इसके अलावा 817 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, करीब 3000 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और 15, 294 सब सेन्टर हैं।

नई व्यवस्था में सभी जिला अस्पताल, उप-जिला अस्पताल और सैटेलाइट अस्पतालों को शामिल किया गया है। इस मॉडल के पहले फेज में 50 मरीजों की ओपीडी वाले स्वास्थ्य केन्द्रों को ही स्पोक बनाया गया है। यानि कुल सीएचसी की 99 फीसदी सीएचसी इसमें शामिल हैं, जबकि 500 से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को स्पोक लैब बनाया गया है।

जहां मरीजों की ओपीडी 50 से कम है और पर्याप्त जगह नहीं है, उन पीएचसी को इनमें शामिल नहीं किया गया है। जिन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और सब सेंटर को इस मॉडल में शामिल नहीं किया गया है, वहां पहले की तरह 15 सामान्य जांचे होती रहेंगी।

सवाल : कौन-कौन सी नई जांचें जोड़ी जा रही हैं और उनका बाहर कितना पैसा लगता है? जवाब : मदर, हब और स्पोक में वर्तमान में हो रही जांचों से दो गुना से ज्यादा नई जांचे शामिल की गई है। इनमें कई जांच ऐसी हैं, जिन पर मरीजों को बाहर हजारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं। उनमें से कुछ जांचों की बाजार कीमतें (अनुमानित)…

हार्मोन का ANTI MULLERIAN HORMONE (AMH) टेस्ट : प्राइवेट लैब में करीब 1500 रुपए का होता है, अब निशुल्क होगा।

कैंसर की जांच के लिए CA-125 और CA- 19.9 टेस्ट : प्राइवेट लैब पर इस जांच के 1000 से 1500 रुपए लगते हैं, यहां निशुल्क होगी।

VITAMIN-B12 का टेस्ट : प्राइवेट लैब में करीब 800 से हजार रुपए का होता है, जो अब निशुल्क होगा।

TORCH PANEL टेस्ट : प्राइवेट लैब में यह जांच 2 हजार से 2500 रुपए में होती है।

आर्थोराइटिस के लिए होने वाला ANTI-CCP टेस्ट : करीब 1100 रुपए खर्च करने पड़ते थे।

THYROID PEROXIDASE ANTIBODIES (TPO) : इस टेस्ट के लिए 650 रुपए लगते थे, अब नहीं लगेंगे।

स्क्रब टाइफस का ANTIBODY IgM टेस्ट : प्राइवेट लैब पर चार्ज एक हजार रुपए है।

SMS हॉस्पिटल जैसे मेडिकल कॉलेज में पहले से एडवांस लैब हैं।

SMS हॉस्पिटल जैसे मेडिकल कॉलेज में पहले से एडवांस लैब हैं।

सवाल : फ्री जांच के लिए पात्रता की शर्त क्या है? जवाब : राजस्थान के सभी निवासियों के लिए निशुल्क जांच की सुविधा होगी। आधार कार्ड या जनाधार कार्ड नंबरों पर ओपीडी की पर्ची कटवाने के बाद डॉक्टर जो जांच लिखकर देंगे, उसकी अलग से पर्ची कटवानी होगी जो निशुल्क है। उसी पर्ची के आधार पर मरीज जांच करवा सकते हैं।

घर बैठे सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बुक करने का तरीका जानिए….

‘राज उपचार ऐप’ के जरिए मरीज ओपीडी टाइमिंग के दौरान ऑनलाइन भी अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। आभा आईडी या फिर जन आधार नंबर डालने पर टोकन नंबर मिल जाएगा। ऑनलाइन बुकिंग करने वालों के लिए अस्पताल में अलग से काउंटर बना है। वहां जाकर परामर्श पर्ची लेनी होगी। इसके बाद डॉक्टर के पास परामर्श के लिए पहुंचा जा सकता है…(CLICK कर पूरी खबर पढ़ें)

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राजस्थान में मुफ्त जांच की यह खबर भी पढ़िए…

शुगर-किडनी-लिवर-थायराइड की जांच के लिए नहीं आना पड़ेगा बड़े हॉस्पिटल:PHC-CHC में भी होंगी 145 तरह की जांचें; नवंबर आखिरी तक शुरू होने की संभावना

राजस्थान सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और जिला अस्पतालों में खून और यूरिन से संबंधित 145 तरह की जांचें आउटसोर्स के जरिए कराने का निर्णय किया है। इन जांचों में शुगर, थायराइड, किडनी-लिवर फंक्शन और विटामिन बी-12 समेत कई तरह की जांचें शामिल होंगी। पढ़ें पूरी खबर…



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