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महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) प्राकृतिक और जैविक खेती के बाद अब बांस की खेती पर भी रिसर्च करेगा। इसके लिए विवि में बांस के लिए टिश्यू कल्चर लैब तैयार हाेगी। यह प्रदेश की पहली लैब होगी। इसमें एक साथ हजारों पौधे तैयार क
वीसी डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने बताया कि केंद्र सरकार ने बांस की खेती के लिए मिशन चला रखा है। अन्य राज्यों से भी बांस की उन्नत किस्म के पौधे लाकर यहां अन्य पौधे तैयार किए जाएंगे। लैब में किसानों के साथ बाजार की डिमांड के हिसाब से पौधे तैयार हाेंगे। इनकी बिक्री से विवि काे अतिरिक्त कमाई हाेगी। बता दें कि उदयपुर जिले में वन विभाग को बांस से हर साल 3 से 4 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है।
बांस कोशिका काे परखनली में रखकर तैयार करेंगे पौधा, किस्म भी उन्नत होगी
टिश्यू कल्चर में बांस की एक कोशिका लेकर पौधा बनाया जाता है। कोशिका काे परखनली में रखकर पौध का निर्माण होता है। इस विधि के जरिये बांस का पौधा 2 से 3 माह में तैयार हाे जाता है। साल में 4 से 5 बार पौधा तैयार किया जा सकता है। लैब में किसी माैसम में इन्हें डिमांड के हिसाब से तैयार किया जा सकता है। दूसरी ओर, सामान्य नर्सरी में साल एक बार ही पौधे तैयार हाे पाते हैं।
किसानों काे जागरूक करने राजसमंद में सेंटर खुलेगा विवि की ओर से बांस की खेती के प्रति किसानों काे जागरूक करने के लिए पहला जागरूकता सेंटर राजसमंद जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में खुलेगा। यहां बांस की विभिन्न प्रजातियों, देशभर में बांस से बनाए जा रहे उत्पाद रखेंगे। बांस काे लेकर देश में हाे रहे नवाचार और खेती के फायदे भी बताए जाएंगे। भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर के वल्लभनगर सहित 8 केवीके में अलग से सेंटर खोले जाएंगे।
फायदा…नर्सरी के मुकाबले जल्द तैयार होंगे
- बांस की प्रजातियों का टिश्यू कल्चर हाेने से सालभर में कई बार पौध तैयार की जा सकेगी। किस्म उन्नत होगी।
- टिश्यू कल्चर में पौधा तैयार हाेने के बाद उसे लैब की ट्रे से निकालकर छोटे-छोटे गमलों में शिफ्ट करेंगे, फिर कहीं भी रोंपा जा सकेगा।
- इस तकनीक से साल सालभर पौधे तैयार कर सकते हैं। अभी नर्सरी में साल में एक बार ही पौधे तैयार होते हैं।
- नर्सरी के पौधों की सालभर देखभाल करनी पड़ती है, जबकि लैब में पौधों की ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं रहेगी। प्रक्रिया भी आसान होगी।
राज्यपाल ने भी रखा था बांस की खेती का प्रस्ताव बांस प्रोजेक्ट को लेकर गत शुक्रवार को राजभवन में राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें उन्होंने कहा था कि यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होगी। राज्यपाल ने निर्देश दिए थे कि सभी विभाग और अनुसंधान संस्थान मिलकर इसे मिशन मोड में आगे बढ़ाना चाहिए। एमपीयूएटी ने प्रोजेक्ट काे लेकर काम करना शुरू कर दिया।
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