राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग ने एक्स-रे और सोनोग्राफी के बाद अब एक और बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और जिला अस्पतालों में खून और यूरिन से संबंधित 145 तरह की जांचें आउटसोर्स के जरिए कराने
इन जांचों में शुगर, थायराइड, किडनी-लिवर फंक्शन और विटामिन बी-12 समेत कई तरह की जांचें शामिल होंगी। अभी तक इन जांचों के लिए मरीजों को जिला मेडिकल कॉलेज या उससे अटैच अस्पतालों में जाना पड़ता था। नए निर्णय से मरीजों को अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही ये सुविधाएं मिल सकेंगी।

मरीजों को अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ही जरूरी की जांच की सुविधाएं मिलेंगी। फोटो- AI जनरेटेड
हेल्थ डिपार्टमेंट के निदेशक (जनस्वास्थ्य) डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया – PHC लेवल पर बड़ी संख्या में शुगर समेत अन्य रूटीन की बीमारी के मरीज आते हैं, जिनको PHC पर इन बीमारियों की जांच की सुविधा नहीं मिलती। ऐसे में इन्हें जिला हॉस्पिटल या उपजिला हॉस्पिटल जाना पड़ता है।
तीन स्तर पर बनाई जाएगी लैब नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के जरिए किए गए टेंडर में इस काम के लिए दिल्ली और पुणे की कंपनियों को हायर किया गया है। ये कंपनियां PHC, CHC, जिला हॉस्पिटल में मौजूदा लैब में ही मशीनरी और मैनपावर लगाएंगी और जांच करके रिपोर्ट देंगी। अगर किसी जगह लैब के लिए पर्याप्त जगह नहीं होगी तो कंपनी अपने स्तर पर दूसरी जगह लैब स्थापित करेगी। कोशिश यही रहेगी कि लैब हॉस्पिटल परिसर के अंदर ही रहे।
इसके लिए तीन स्तर पर लैब को डेवलप किया जाएगा। इसमें PHC, डिस्पेंसरी लेवल पर स्पॉक लैब, CHC, सैटेलाइट, उपजिला हॉस्पिटल लेवल पर हब लैब और जिला हॉस्पिटल लेवल पर मदर लैब होगी। स्पॉक लैब की संख्या 1335, हब लैब की संख्या 135 और मदर लैब की संख्या 42 होगी।

PHC, CHC, जिला हॉस्पिटल के मौजूदा लैब में ही मशीनरी और मैनपावर लगाकर दिल्ली और पुणे की कंपनियां काम करेंगी।
दिसंबर से पहले सर्विस शुरू करने का दिया समय इन दोनों कंपनियों को दिसंबर से पहले, नवंबर के आखिर तक यह सुविधा शुरू करने का समय दिया है। सेवा शुरू होने के बाद PHC, डिस्पेंसरी लेवल पर मरीजों को 15 की जगह 53 जांचों की सुविधा मिलेगी। जबकि CHC लेवल पर 37 की जगह 113 और जिला, उपजिला और सैटेलाइट हॉस्पिटल के स्तर पर 57 की जगह 113 जांचों की सुविधा मिलेगी।

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के बड़े मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध हॉस्पिटल में मरीजों का भार कम होगा।
बड़े मेडिकल कॉलेजों से अटैच हॉस्पिटल का लोड होगा कम सरकार के इस फैसले से प्रदेश के बड़े मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध हॉस्पिटलों में मरीजों का भार कम होगा। जयपुर के SMS अस्पताल के अलावा मेडिकल कॉलेज अजमेर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर और RUHS से संबद्ध हॉस्पिटलों में ग्रामीण इलाके या आसपास के छोटे शहरों के मरीजों को जांच के लिए नहीं आना पड़ेगा।
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