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राजस्थान हाईकोर्ट के सभी 42 न्यायाधीशों को विभिन्न जिलों और न्याय क्षेत्रों की गार्जियनशिप (अभिभावकत्व) की जिम्मेदारियां नए सिरे से सौंपी है। चीफ जस्टिस केआर. श्रीराम के आदेश के अनुसार, सभी अभिभावक न्यायाधीश संबंधित जिले में न्यायिक अधिकारियों की कार

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गार्जियनशिप क्या है

गार्जियनशिप न्यायक्षेत्र का मतलब होता है कि किसी बड़े न्यायालय (जैसे कि हाईकोर्ट) के एक-एक न्यायाधीश को राज्य के अलग-अलग जिलों के कोर्ट की ‘देखरेख’ और मार्गदर्शन की जिम्मेदारी देना।

इसमें गार्जियन जज अदालतों का कामकाज, ईमानदारी और कार्यक्षमता पर नजर रखते हैं। अगर किसी इलाके में अदालतों से जुड़ी कोई समस्या है। न्याय की गुणवत्ता सुधारनी है। शासनिक दिशा-निर्देश देने हैं। गार्जियन जज वहां के अधिकारियों को सलाह देंगे। जरूरी परामर्श हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजेंगे। इससे पूरे राज्य की न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहती है।

इन बातों का ध्यान रखेंगे जज

  • उनके इलाके का न्यायिक सिस्टम ठीक चल रहा है या नहीं, किसी तरह की दिक्कतें तो नहीं आ रही।
  • अगर किसी कोर्ट में अनुशासन, काम की गति या ईमानदारी से जुड़ी दिक्कत है। जज उस पर ध्यान देंगे।
  • अपने इलाके का दौरा भी करेंगे। अधिकारियों से मिलेंगे और जरूरत पड़ने पर सुझाव या सुधार बताएंगे।

जिलेवार मिली जिम्मेदारी



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