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राजस्थान हाईकोर्ट ने पशु परिचर (एनिमल अटेंडेंट) भर्ती के रिजल्ट को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में कुछ अभ्यर्थियों ने शिकायत की थी कि राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड द्वारा अपनाया गया भर्ती में नंबरों को बराब

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दरअसल, नितेश पाटीदार (डूंगरपुर), महेश कुमार (डीडवाना-कुचामन), हिमांशु सुथार (डूंगरपुर), राकेश रुले (चूरू) , अंकित कुमार (श्रीगंगानगर), अशोक जाट (चित्तौड़गढ़), सुखलाल उपाध्याय (चूरू), राकेश रिंवा (नागौर), मानाराम (बाड़मेर), दिलीपसिंह (सिरोही), अल्ताफ कुरैशी (नागौर), मंजू बाला (गंगानगर), विपुल कुमार (बांसवाड़ा), सचिन गनोलिया (चूरू) और कृष्णपाल सिंह (पाली) की ओर से स्केलिंग फॉमूले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

इन याचिकाकर्ताओं का कहना था कि 3 अप्रैल को आए एनिमल अटेंडेंट भर्ती रिजल्ट में स्केलिंग फॉर्मूले का इस्तेमाल किया गया है। जबकि 6 अक्टूबर, 2023 के विज्ञापन में सिर्फ नेगेटिव मार्किंग की बात कही गई थी। विज्ञापन में यह साफ लिखा था कि हर सही जवाब के लिए एक नंबर मिलेगा और हर गलत जवाब के लिए 1/4 नंबर कटेगा।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि विज्ञापन में कहीं भी स्केलिंग, नॉर्मलाइजेशन या रेशनलाइजेशन जैसी किसी भी तरीके का जिक्र नहीं था। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि स्केलिंग के बाद भी उम्मीदवारों के ‘रॉ मार्क्स’ (बिना स्केलिंग के मिले नंबर) घोषित नहीं किए गए और न ही रिजल्ट के साथ अलग-अलग कैटेगरी के लिए कट-ऑफ मार्क्स बताए गए।

बोर्ड ने कहा – 17 लाख आवेदकों की एक दिन-एक पारी में परीक्षा कैसे संभव होती

राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RSMSSB) की ओर से एडवोकेट मनीष पटेल ने कोर्ट में बताया गया कि इस भर्ती के लिए 17 लाख से ज़्यादा आवेदन आए थे। इतने सारे उम्मीदवारों की परीक्षा एक ही दिन या एक ही शिफ्ट में कराना संभव नहीं था, इसलिए परीक्षा कई शिफ्टों में आयोजित करनी पड़ी। बोर्ड ने कहा कि जब यह तय हो गया कि परीक्षा कई शिफ्टों में होगी, तो यह भी समझ आ गया कि सभी उम्मीदवारों के बीच बराबरी बनाए रखने के लिए नॉर्मलाइजेशन/स्केलिंग तरीका अपनाना ज़रूरी होगा। इसी वजह से 5 जून, 2024 को एक सर्कुलर जारी करके यह बताया गया कि परीक्षा अलग-अलग शिफ्टों में होगी और इस भर्ती में नॉर्मलाइजेशन का तरीका अपनाया जाएगा। इस सर्कुलर को मूल विज्ञापन का ही हिस्सा माना गया।

असफल उम्मीदवारों के रॉ मार्क्स घोषित

‘रॉ मार्क्स’ घोषित न करने के बारे में बोर्ड ने माना कि पहली सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठाए जाने के बाद, राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड (RSMSSB) ने असफल उम्मीदवारों के ‘रॉ मार्क्स’ घोषित कर दिए हैं।

एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव से स्केलिंग फॉमूले तय

एडवोकेट पटेल ने स्केलिंग फॉर्मूले के बारे में बताया गया कि इसे एक एक्सपर्ट कमेटी ने सुझाया था, जिसे इसी काम के लिए बनाया गया था। समिति ने सभी छह शिफ्टों के प्रश्नपत्रों की अच्छी तरह से जांच की, उनकी कठिनाई के स्तर को समझा और फिर एक खास फॉर्मूला सुझाया ताकि अलग-अलग शिफ्टों में परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के बीच बराबरी बनी रहे।

पहले बताया, तब आपत्ति नहीं की, रिजल्ट के बाद क्यों?

सरकार की ओर से AG राजेंद्र प्रसाद व AAG आई. आर. चौधरी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने यह आरोप नहीं लगाया है कि बोर्ड ने बेईमानी की या स्केलिंग फॉर्मूला लगाते समय कोई मनमाना या गलत फॉर्मूला इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवारों को पहले ही बता दिया गया था कि नॉर्मलाइजेशन होगा, और अब जब रिजल्ट आ गया है, तो उम्मीदवार इसे चुनौती नहीं दे सकते क्योंकि उन्होंने उस समय कोई आपत्ति नहीं उठाई थी।

कोर्ट ने क्या कहा?

इस मामले में जस्टिस रेखा बोराणा की कोर्ट ने पाया कि यह बात साफ थी कि लिखित परीक्षा अलग-अलग शिफ्टों में होगी और नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यह बात 5 जून, 2024 के सर्कुलर में बता दी गई थी। इसका मतलब है कि सभी उम्मीदवारों को उस समय इसकी जानकारी थी। किसी ने भी उस समय इस शर्त या प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाया।

कोर्ट ने दोहराया कि कानून के हिसाब से, कोई भी उम्मीदवार जो भर्ती प्रक्रिया में शामिल होता है, वह बाद में, असफल घोषित होने के बाद, विज्ञापन की किसी भी शर्त को चुनौती नहीं दे सकता। इस बारे में, कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘तजवीर सिंह सोढ़ी और अन्य बनाम जम्मू और कश्मीर राज्य और अन्य’ (2023) 17 SCC 147 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि उम्मीदवार, जो बिना किसी आपत्ति के चयन प्रक्रिया में शामिल हुए थे, वे असफल घोषित होने के बाद उसे चुनौती नहीं दे सकते।

कोर्ट ने यह भी माना कि 17 लाख से ज़्यादा उम्मीदवारों की परीक्षा एक ही दिन या एक ही शिफ्ट में कराना असंभव था। इसलिए, परीक्षा को अलग-अलग शिफ्टों में कराने का बोर्ड का फैसला बिल्कुल सही था। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब कोई परीक्षा अलग-अलग शिफ्टों में होती है, तो नॉर्मलाइजेशन/स्केलिंग/रेशनलाइजेशन प्रक्रिया को अपनाना ही सभी उम्मीदवारों के बीच बराबरी बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में भी ऐसा ही किया गया है, जो गलत नहीं है।



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