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ऑनलाइन कॉल गर्ल बुक कराने के नाम पर हाई-प्रोफाइल लोगों को ठगने का ये खेल जयपुर में एक छोटे-से कमरे में चल रहा था। 25 साल का एक ग्रेजुएट युवक इसका मास्टरमाइंड निकला। उसने किराए के कमरे में एक कॉल सेंटर बनाकर अपनी ही तरह बेरोजगार लड़के-लड़कियों को नौकरी पर रखा था।
ये गैंग AI से सुंदर लड़कियों की तस्वीरें तैयार करती, फिर उन्हें ग्राहकों को भेजकर एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर ठगी को अंजाम देती। जयपुर में बैठकर गैंग ने 5 राज्यों के कई शहरों में अपना नेटवर्क फैला लिया था। सैकड़ों लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना चुकी थी।
उत्तरप्रदेश के एक इंजीनियर की शिकायत पर इसका खुलासा हुआ। जयपुर पुलिस जब छापा मारने पहुंची तो खुद चौंक गई। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए पूरी कहानी…
वेबसाइट पर ऑनलाइन एड देकर फंसाते थे शिकार जयपुर पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर चंदवाजी थाना क्षेत्र में कॉल सेंटर पर छापा मारकर 4 युवकों और 2 लड़कियों को पकड़ा था। इनमें एक लड़की नाबालिग थी। पुलिस जांच में सामने आया कि एस्कॉर्ट सर्विस गैंग का मास्टरमाइंड विकास यादव (25) है। वह कॉल गर्ल उपलब्ध कराने वाली वेबसाइट्स पर ऑनलाइन एस्कॉर्ट सर्विस का विज्ञापन देता था।
चंदवाजी थाना इंचार्ज हीरालाल सैनी ने बताया कि आरोपी राजस्थान के अलावा अन्य राज्यों में भी ऑनलाइन विज्ञापन देता था, ताकि वहां के किसी शख्स को ठगी का शिकार बनाएं तो वह पुलिस कार्रवाई नहीं कर सके।

आरोपी इस तरह वेबसाइट्स पर ऑनलाइन विज्ञापन देकर लोगों को फंसाते थे।
आगरा, ग्वालियर, लखनऊ, दिल्ली सहित अलग-अलग राज्यों और शहरों में ये विज्ञापन देते। लेकिन, उसमें जयपुर में बैठे आरोपियों के वॉट्सऐप नंबर दिए जाते थे। उन नंबरों से जब कोई कॉन्टैक्ट करता तो कॉल सेंटर में भर्ती युवक-युवतियां चैट, कॉलिंग और वीडियो कॉल कर उन्हें झांसे में लेते। कस्टमर को विश्वास दिलाने के लिए गिरोह में शामिल लड़कियां उनसे बात करती थीं।
पुलिस पूछताछ में आरोपी विकास ने बताया कि पहले वह अकेला ऑनलाइन कॉल गर्ल उपलब्ध कराने का झांसा देकर ठगी करता था। लोगों की डिमांड बढ़ने पर उसने 3 महीने पहले बेरोजगार युवक-युवतियों को भी अपने गिरोह में भर्ती कर लिया था।

सबकुछ रियल दिखाने के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट का झांसा शातिर आरोपी सबकुछ रियल दिखने के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट का झांसा देते थे। ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने के लिए कस्टमर से 15 से 20 हजार रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट कराने को कहते। आरोपियों के मोबाइल फोन में मिली ऑडियो क्लिप से इसका खुलासा हुआ है।
कोई कस्टमर सवाल करता कि ये चार्ज किस बात का है तो आरोपी उन्हें हिदायत देते हुए कहते- अगर कस्टमर लड़की के साथ क्रूरता नहीं करेंगे तो ये सिक्योरिटी डिपॉजिट उन्हें वापस मिल जाएगी। अगर उन्होंने लड़की के साथ क्रूरता की तो इस अमाउंट को जब्त कर लिया जाएगा। इसके बाद कस्टमर ऑनलाइन पेमेंट उनके बताए बैंक अकाउंट में जमा करवा देते थे।

चंदवाजी थाना पुलिस के हत्थे चढ़े गिरोह के सदस्य।
सर्विस की डिमांड के अनुसार लेते थे चार्ज गिरोह कस्टमर की डिमांड पर घर या होटल कहीं भी कॉल गर्ल उपलब्ध कराने का दावा करता था। इसके लिए कस्टमर को 5 हजार से 10 हजार रुपए तक का अतिरिक्त पेमेंट करना होता था। वॉट्सऐप पर लड़की की फोटो पसंद आने पर ये कस्टमर से ऑनलाइन पेमेंट लेते थे। आरोपियों के जब्त मोबाइल फोन में हजारों लड़कियों के फोटाे मिले हैं। ऑनलाइन पेमेंट मिलने पर कस्टमर की लोकेशन मंगाकर गूगल से उसके आस-पास के किसी होटल, रिसोर्ट या बार की लोकेशन भेजकर उन्हें बुलाते थे।
शिकार को फंसाने के लिए रखी लड़कियां शिकार फंसने के बाद गिरोह में शामिल लड़कियां कस्टमर से बात करती थीं। इसके बाद उनसे सर्विस चार्ज, होटल चार्ज, सेफ्टी किट चार्ज (टैबलेट आदि) के नाम पर क्यूआर कोड भेजकर 10 से 20 हजार रुपए का अतिरिक्त ऑनलाइन पेमेंट करने का दबाव डाला जाता था। एक बार पेमेंट होने पर जब आरोपियों को लगता था कि अब कस्टमर और पेमेंट नहीं कर रहा है या लड़की भेजने का दबाव बनाने लगा है तो उस नंबर को ब्लॉक कर देते थे।

एआई से तैयार करते थे गर्ल्स के फोटोग्राफ्स आरोपी कॉल गर्ल के फोटोग्राफ्स एआई की मदद से तैयार करते थे। इसके लिए गूगल और कई सोशल मीडिया साइट्स पर उपलब्ध सुंदर लड़कियों के फोटोग्राफ्स को AI टूल से थोड़ा बदलाव कर तैयार करते। जिस राज्य या शहर से एस्कॉर्ट सर्विस की डिमांड आती थी। उसी क्षेत्र की वेशभूषा के अनुसार युवतियों के फोटोग्राफ्स तैयार कर कस्टमर को भेजते थे।
आरोपियों के मोबाइल फोन में हजारों की संख्या में युवतियों और लड़कियों के फोटोग्राफ्स मिले हैं। आरोपी हाई-प्रोफाइल लोगों को ही अपना शिकार बनाते थे, जिससे एक ही कस्टमर से ज्यादा रुपए ठगे जा सकें।
5 राज्यों में फैला था एस्कॉर्ट सर्विस का नेटवर्क जयपुर ग्रामीण जिला पुलिस की साइबर सेल के उप अधीक्षक खलील अहमद ने बताया- आरोपियों से जब्त मोबाइल नंबरों को समन्वय पोर्टल पर चेक किया गया। इन नंबरों के खिलाफ अभी तक 5 राज्यों में शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें साइबर क्राइम पोर्टल (1930) पर महाराष्ट्र के मुंबई, उत्तरप्रदेश के गाजीपुर व गौतमबुद्ध नगर, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और तेलंगाना के साइबराबाद में दर्ज होना पाई गई हैं। इन सभी से ऑनलाइन एस्कॉर्ट सर्विस देने के नाम से ठगी की गई।

इस तरह से AI से फोटो जनरेट कर ग्राहकों को भेजा जाता था।
आरोपी ऑनलाइन डिमांड के अनुसार लड़की उपलब्ध कराने का दावा करते थे। वॉट्सऐप पर फोटो भेजकर सौदा होता था। आरोपियों ने पूजा शर्मा के नाम से वॉट्सऐप ग्रुप भी बना रखा था। इसमें अपने अन्य मोबाइल नंबर को लड़कियों के नाम से सेव कर रखा था। ग्रुप में चैट, वॉइस चैट, लड़कियों के फोटाे और क्यूआर कोड स्कैनर शेयर किए जाते थे। कस्टमर को इस ग्रुप से जोड़कर उसे लड़कियों से बात कराई जाती थी।
10 हजार रुपए महीने में ठगी की नौकरी गिरोह के बारे में साइबर सेल के ऑनलाइन पोर्टल से जयपुर ग्रामीण पुलिस को सूचना मिली थी। इस पर जयपुर ग्रामीण पुलिस की साइबर टीम और चंदवाजी थाना पुलिस ने आरोपी की लोकेशन के आधार पर एसबीआई के पास सुरेश गुर्जर के मकान पर 27 अगस्त को दबिश दी। मकान पर 4 युवक, एक युवती और एक नाबालिग लड़की कस्टमर से बात कर रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने ठगी की वारदात करना कबूल किया।
चंदवाजी इंचार्ज हीरालाल सैनी ने बताया कि इस कॉल सेंटर का मालिक विकास यादव है। विकास ने ही अन्य सभी को 10 हजार रुपए महीने पर जॉब पर रखा था।

आरोपियों के कब्जे से जब्त मोबाइल और बैंक के एटीएम व क्रेडिट कार्ड।
मास्टरमाइंड ने बेरोजगार युवक-युवतियों काे जोड़ा पुलिस जांच में सामने आया कि विकास यादव ग्रेजुएट है। कोई नौकरी नहीं मिलने पर उसने एस्कॉर्ट सर्विस के नाम पर ऑनलाइन ठगी करना शुरू कर दिया था। विकास ने डिमांड बढ़ने पर स्थानीय बेरोजगार युवक-युवतियों को इस काम में शामिल कर लिया। कॉल सेंटर पर काम करने वाले अन्य युवक-युवती भी बेरोजगार हैं और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इन्हें विकास यादव ने साइड जॉब का ऑफर देकर नौकरी पर रखा था।
युवकों ने अपने मोबाइल नंबर से वॉट्सऐप पर अकाउंट बना रखे थे। इन अकाउंट्स में भी लड़कियों के फोटोग्राफ्स लगा रखे थे। पुलिस को जब्त मोबाइल फोन और वॉट्सऐप ग्रुप से कई जानकारी मिली हैं। एक ऑडियो में विकास यादव अन्य साथियों को वॉइस चैट भेजकर निर्देश दे रहा था। इस वॉइस चैट में विकास अधिक से अधिक कस्टमर से बात करके पैसे मंगवाने के निर्देश दे रहा था। विकास अपने साथियों को इसके लिए मैडम से बात कराने और कस्टमर से प्यार से बात करने के बारे में कहता है।

पिंक और ऑरेंज डायरी में मिला 40 लाख ठगी का हिसाब पुलिस ने कॉल सेंटर से 13 मोबाइल फोन, अलग-अलग बैंक के 10 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। कॉल सेंटर से दो डायरी पिंक और ऑरेंज मिली हैं। इनमें करीब 40 लाख रुपए की साइबर ठगी का हिसाब मिला है। इसके अलावा कॉल सेंटर से आधार कार्ड, बैंक पास बुक्स, पेन कार्ड भी मिले हैं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चंदवाजी थाना में धारा 295/25, धारा 319(2), 318(4), 336(3), 340(2), 61(2) बीएनएस व सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 की धारा 66डी में केस दर्ज किया है। केस की जांच पुलिस उप अधीक्षक साइबर सेल खलील अहमद कर रहे हैं।
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