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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड आज (1 अगस्त) को 69वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। बोर्ड हर साल 10वीं-12वीं के करीब 20 लाख स्टूडेंट्स के लिए एग्जाम की व्यवस्था करता है। साथ ही रीट सहित अन्य एग्जाम की जिम्मेदारी भी बोर्ड के पास है। आंकड़ा देखा जाए तो ब

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बोर्ड के पास तीन साल से मुखिया भी नहीं है। REET-2021 पेपर लीक को लेकर साल 2022 में बोर्ड के चेयरमैन डी.पी. जारोली को सरकार ने बर्खास्त कर दिया था। उसके बाद आज तक चेयरमैन (मुखिया) नहीं लगाया गया। वर्तमान में अजमेर के संभागीय आयुक्त शक्ति सिंह को प्रशासक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से 10वीं-12वीं एग्जाम के लिए रीट जैसी बड़ी परीक्षा का आयोजन भी करवाया जाता है।

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से 10वीं-12वीं एग्जाम के लिए रीट जैसी बड़ी परीक्षा का आयोजन भी करवाया जाता है।

बोर्ड का इतिहास…

1 अगस्त 1957 को राजस्थान सरकार ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की स्थापना की थी। गांधी नगर जयपुर में कालाजी की बिल्डिंग में बोर्ड ऑफिस खोला गया था। बोर्ड के पहले चेयरमैन जी.सी. चटर्जी थे। 1958 से 1960 तक की परीक्षाएं जयपुर में हुई। बोर्ड की जब शुरुआत हुई थी, तब ढाई सौ स्कूल थी। आज स्कूलों की संख्या 34000 है।

  • 4 दिसम्बर 1961 को बोर्ड ऑफिस अजमेर स्थानान्तरित किया गया। जयपुर रोड पर बम्बे वाली कोठी और नजर बाग में यह ऑफिस संचालित होने लगा। 1972 तक ये ऑफिस यही पर संचालित होता रहा।
  • 1973 में तत्कालीन अध्यक्ष के.एल. बोर्दिया के प्रयासों से जयपुर रोड पर बने इस बहुमंजिला भवन में ऑफिस स्थानान्तरित हुआ। तब से लेकर ऑफिस का संचालन यहीं पर किया जा रहा है।
  • बोर्ड की ओर से 10वीं, 12वीं एग्जाम के अलावा राष्ट्रीय प्रतिभा खोज, राज्य विज्ञान प्रतिभा खोज परीक्षा का आयोजन भी कराया जाता है। 2016 में पहली बार REET का आयोजन भी किया।
बोर्ड सचिव कैलाश चन्द्र शर्मा ने कहा, समय-समय पर कई नवाचार भी किए गए है।

बोर्ड सचिव कैलाश चन्द्र शर्मा ने कहा, समय-समय पर कई नवाचार भी किए गए है।

बोर्ड का अधिकांश काम ऑनलाइन होता

बोर्ड सचिव कैलाश चन्द्र शर्मा ने बताया-बोर्ड आज स्थापना दिवस मना रहा है। निरन्तर स्टाफ कम हुआ है और बच्चों की संख्या बढ़ी है। फिर भी प्रयास किया है बोर्ड की प्रतिष्ठा बनी रहे। कई नवाचार समय-समय पर किए है।

बोर्ड का अधिकांश काम ऑनलाइन हो रहा है। बता दें कि राजस्थान बोर्ड की ओर से पहला एग्जाम 1958 में लिया गया था। इसमें प्रदेश के 250 स्कूल के 29 हजार 142 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे। आज यह संख्या कई गुना बढ़ गई है।

1957 में बोर्ड के पास 250 स्कूल थी और आज 2025 में 34 हजार स्कूल है।

1957 में बोर्ड के पास 250 स्कूल थी और आज 2025 में 34 हजार स्कूल है।

सालस्टाफस्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया
19978507 लाख
202527220 लाख

साल 2025 एग्जाम – एक नजर

साल 2025 में हुए एग्जाम में 19 लाख 98 हजार 509 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे। इसमें 10वीं- 10 लाख 96 हजार 85 और 12वीं- 8 लाख 91 हजार 190, प्रवेशिका- 7 हजार 324, वरिष्ठ उपाध्याय के 3 हजार 910 स्टूडेंट्स थे। वर्तमान में 34 हजार से ज्यादा स्कूल है।

डॉ. धर्मपाल जारोली, रीट पेपर लीक मामले में 2022 में हुए थे बर्खास्त।

डॉ. धर्मपाल जारोली, रीट पेपर लीक मामले में 2022 में हुए थे बर्खास्त।

बोर्ड के पास 3 साल से मुखिया नहीं

REET पेपर लीक मामले को लेकर साल 2020 में सरकार ने बोर्ड के अध्यक्ष डी.पी. जारोली को बर्खास्त कर दिया था। उसके बाद से बोर्ड चेयरमैन के पद पर कोई नियुक्ति नहीं की गई।

  • 131 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है – SOG ने REET पेपर लीक मामले में अब तक मुख्य आरोपी रामकृपाल मीणा और प्रदीप पाराशर सहित 131 आरोपियों को अरेस्ट किया है। रामकृपाल की गिरफ्तारी के बाद SOG ने ED को कार्रवाई के लिए फाइल भेजी थी। ईडी ने सितम्बर 2024 में रामकृपाल और प्रदीप पाराशर के चार बैंक खातों को फ्रीज किए थे। इन खातों में करीब 10 लाख 89 हजार रुपए जमा हैं। फरवरी 2022 में रामकृपाल की गोपालपुरा बाइपास स्थित स्कूल और कॉलेज की तीन मंजिला बिल्डिंग को भी जेडीए ने गिरा दिया था।
  • पाराशर ने दिया था रामकृपाल को पेपर – पेपर लीक के मुख्य सरगना प्रदीप पाराशर को REET का जयपुर जिला कोआर्डिनेटर बनाया गया था। जयपुर के स्ट्रॉन्ग रूम से पेपर लीक में प्रदीप पाराशर की भूमिका सामने आई थी। SOG ने प्रदीप पाराशर को 30 जनवरी 2022 को गिरफ्तार किया था। SOG जांच में सामने आया कि प्रदीप पाराशर के जरिए ही रामकृपाल मीणा को पेपर मिला था। इसने अपने नेटवर्क के जरिए कई अभ्यर्थियों को पेपर पढ़वाया था।
  • स्ट्रॉन्ग रूम से लीक हुआ था पेपर – एसओजी ने खुलासा किया था कि जयपुर शिक्षा संकुल के स्ट्रॉन्ग रूम से पेपर लीक हुआ था। इसी के बाद से राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रहे डीपी जारौली और उनके दोस्त प्रदीप पाराशर दोनों शक के घेरे में आए थे। एसओजी की जांच में खुलासा हुआ था कि पेपर 1.25 करोड़ रुपए में बेचा गया। पेपर स्ट्रॉन्ग रूम से निकालकर कोचिंग संचालकों और नकल गिरोह तक पहुंचाया गया। यह भी सामने आया कि J-सीरीज का पेपर स्ट्रॉन्ग रूम से लीक किया गया और अलग-अलग सेंटर पर बांटा गया। पेपर जयपुर, जालोर, सिरोही, टोंक, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, दौसा, करौली सहित कई जगहों पर पहुंचाया गया। नकल गिरोह ने परीक्षा से पहले करीब 50 सेंटर पर पेपर पहुंचाया था।



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