कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग और आगाज द अमेजिंग रंगमंच ग्रुप की ओर से रवींद्र मंच पर नाटक ‘दूल्हे राजा खतरे में’ की प्रस्तुति दी गई।
कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग और आगाज द अमेजिंग रंगमंच ग्रुप की ओर से रवींद्र मंच पर नाटक ‘दूल्हे राजा खतरे में’ की प्रस्तुति दी गई। नाटक ने समाज में मौजूद लैंगिक अस्वीकार्यता, लालच और रिश्तों की जटिलताओं को बेहद प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा। नाट
नाटक की कहानी एक ऐसी समलैंगिक लड़की रानी पर केंद्रित है, जो समाज और परिवार के डर से दो पुरुषों की हत्या की साजिश रचती है, ताकि वह अपनी महिला प्रेमिका से विवाह कर सके और देश छोड़ कर विदेश में नई जिंदगी शुरू कर सके।

नाटक ने समाज में मौजूद लैंगिक अस्वीकार्यता, लालच और रिश्तों की जटिलताओं को बेहद प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा।
कथानक में रानी की बड़ी बहन, लालच और सामाजिक डर के बीच उलझती है। रानी अपने फायदे के लिए एक विकलांग अध्यापक और एक गुंडे को प्यार और शादी का झूठा सपना दिखाकर मौत के घाट उतार देती है। इन हत्याओं के पीछे मकसद है – धन इकट्ठा कर समाज से भाग जाना, क्योंकि वह खुलकर अपनी समलैंगिक पहचान को स्वीकार नहीं कर सकती।
नाटक के अंत में जब रानी अपनी बहन को सच्चाई बताती है कि वह जिस ‘दोस्त’ से शादी करना चाहती है, वह एक लड़की है, तो मंच पर एक तीखा सामाजिक प्रश्न उठता है — क्या एक लड़की को लड़की से प्रेम करने और विवाह करने का अधिकार नहीं है? क्या समाज उसकी पहचान को स्वीकार नहीं कर सकता?
निर्देशक ने इस प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया कि समलैंगिकता कोई अपराध नहीं, बल्कि प्रकृति की एक अभिव्यक्ति है, जिसे समाज को समझने और स्वीकारने की जरूरत है। जब समाज उन्हें स्वीकार नहीं करता, तो वे गलत रास्तों की ओर धकेले जाते हैं।
नाटक में डॉ. बुलबुल नायक, मनन आसुदानी, खुशबू आसुदानी, भानु वाटवानी, करन सोनी, इमरान कुरैशी, राजेश्वरी भातरा और सोनिया आचार्य ने अभिनय किया। सभी कलाकारों ने गहन भावों और सामाजिक सच्चाइयों को प्रभावशाली मंच भाषा के माध्यम से प्रस्तुत किया।
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