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स्मार्ट मीटर और निजीकरण के खिलाफ फूटा जन आक्रोश
झुंझुनूं में बिजली विभाग की नीतियों, विशेषकर स्मार्ट मीटर और निजीकरण के विरोध में सोमवार को बड़ा जन प्रदर्शन हुआ। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) की तहसील कमेटी के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में लोग, जिनमें महिलाएं, किसान, और युवा शामिल थे।
हाउसिंग बोर्ड स्थित बिजली विभाग के ग्रिड सब स्टेशन (GSS) के बाहर इकट्ठा हुए और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी बिजली विभाग की कार्यप्रणाली, ठेका प्रथा और उपभोक्ताओं की शिकायतों की अनदेखी को लेकर काफी आक्रोशित दिखे।
स्मार्ट मीटर पर भारी भरकम बिलों का आरोप
प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा स्मार्ट मीटरों को लेकर था। पार्षद शारदा चौधरी ने आरोप लगाया कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना मीटर बदले जा रहे हैं, जिसके कारण बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि कई लोगों के बिल पहले के मुकाबले दो से तीन गुना तक बढ़ गए हैं, जबकि उनकी बिजली खपत में कोई बदलाव नहीं आया है। खेतड़ी से आई एक महिला उपभोक्ता ने भी अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनका बिल 500-600 से बढ़कर अचानक 1,800 हो गया है, लेकिन विभाग में कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
निजीकरण और ठेका प्रथा के खिलाफ बुलंद हुई आवाज
प्रदर्शन में बिजली विभाग के निजीकरण और ठेका प्रथा को भी बड़ा मुद्दा बनाया गया। DYFI के जिला सचिव योगेश कटारिया ने सरकार के इस फैसले को जनविरोधी बताया। उन्होंने कहा कि ठेका प्रथा के कारण विभाग में जवाबदेही खत्म हो गई है, जिससे लापरवाही और देरी आम बात हो गई है। किसान नेता महिपाल पूनिया ने गांवों की बदहाल बिजली व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने पर हफ्तों तक नहीं बदले जाते, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं।
प्रशासन को 5-सूत्रीय मांग पत्र सौंपा
प्रदर्शन के दौरान, जिला प्रशासन को एक पांच-सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया। इन मांगों में शामिल हैं।
* उपभोक्ताओं की सहमति के बिना लगाए गए स्मार्ट मीटरों को तुरंत हटाया जाए।
* नई स्मार्ट मीटर योजना पर तत्काल रोक लगाई जाए।
* बिजली निगम के निजीकरण और ठेका प्रथा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए।
* विभागीय इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाए।
* उपभोक्ता शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
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