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एक तरफ प्रदेश में जर्जर भवनों को लेकर शिक्षा विभाग की किरकिरी हो रही है। दूसरी तरफ शिक्षा विभाग ने बालिकाओं को दिए जाने वाले पुरस्कार को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। विभाग ने इंदिरा प्रियदर्शिनी पुरस्कार का नाम बदलकर फिर से पद्माक्षी पुरस्कार कर द

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विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब 8वीं की बालिका को 25 हजार रुपए, 10वीं की बालिका को 50 हजार रुपए और 12वीं की बालिका को 75 हजार रुपए पुरस्कार के रूप में दिए जाएंगे। पहले 8वीं की बालिका को 40 हजार रुपए, 10वीं की बालिका को 75 हजार रुपए और 12वीं की बालिका को 1 लाख रुपए और स्कूटी दी जाती थी।

जिला व राज्य स्तर पर होता है चयन राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 8वीं, 10वीं एवं 12वीं की परीक्षाओं में प्रत्येक जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बालिकाओं को यह पुरस्कार दिया जाता है। संस्कृत शिक्षा विभाग की कक्षा 8वीं, प्रवेशिका एवं वरिष्ठ उपाध्याय की बोर्ड परीक्षा में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली, कक्षा 10वीं व 12वीं (व्यावसायिक शिक्षा) की राज्यस्तर पर प्रथम स्थान वाली, स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल विद्यालय की कक्षा 12वीं (विज्ञान वर्ग) में 9वीं सीजीपीए से अधिक अंक के साथ स्वामी विवेकानंद मॉडल विद्यालय की छात्राओं में से राज्यस्तर पर प्रथम स्थान वाली छात्राओं को पुरस्कार दिया जाता है।

यह है पुरस्कार की योजना; 8 कैटेगरी में दिया जाता है पुरस्कार

माध्यमिक एवं प्रारंभिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में अध्ययनरत 8 कैटेगरी सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, बीपीएल एवं निशक्त वर्ग (दिव्यांग) की राजस्थान की मूल निवासी बालिकाओं को यह पुरस्कार दिया जाता है, जिससे बालिकाओं का हौसला अफजाई हो सके।



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