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राजस्थान नर्सिंग ऑफिसर यूनियन ने जयपुर के पिंक सिटी प्रेस क्लब में एक प्रेसवार्ता आयोजित की। इसमें संविदा और निविदा पर कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों व अन्य कर्मचारियों की विभिन्न मांगों पर चर्चा की गई। सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट सुमित्रा चौधरी और यूनियन क

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यूनियन ने बताया कि प्रदेश के अस्पतालों में कई वर्षों से नर्सिंग अधिकारी सहित अन्य कर्मचारी संविदा या निविदा पर काम कर रहे हैं। उन्हें मात्र 7677 रुपए मासिक वेतन मिलता है, जो कि एक परिवार की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। इस अल्प वेतन के कारण उनका भविष्य असुरक्षित है।

बढ़ती महंगाई, पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार वृद्धि से इन कर्मचारियों का जीवन कठिन हो गया है। उन्हें ड्रेस भत्ता या दिवाली भत्ता जैसी कोई सरकारी सुविधा भी नहीं मिलती, जिससे त्योहार मनाना भी मुश्किल हो जाता है।

यूनियन की मुख्य मांग है कि आगामी नर्सिंग ऑफिसर भर्ती में 13,500 जीएनएम और 500 एएनएम पदों पर सीधी भर्ती पूर्व की भांति मेरिट और बोनस के आधार पर की जाए। यूनियन इस मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है।

संविदा डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और एएनएम सहित अन्य कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित करने और उनके मासिक वेतन भत्ते में वृद्धि करने की मांग

इसके अतिरिक्त, यूनियन ने मुख्यमंत्री से मेडिकल कॉलेजों और सीएमएचओ के अधीन कार्यरत संविदा डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और एएनएम सहित अन्य कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित करने और उनके मासिक वेतन भत्ते में वृद्धि करने की अपील की। वर्तमान वेतन मजदूर वर्ग से भी कम है और जिन एजेंसियों द्वारा यह कार्मिक लगे हुए है उन्हें सरकार द्वारा लागू किया गया मानदेय भी नहीं मिलता और एजेंसियों द्वारा कार्मिकों को मनमर्जी हो जब हटा दिया जाता है।

डूंगरपुर, राजसमंद, कोटा, उदयपुर सहित कई जिलो में ईमानदारी से कार्य कर रहे कार्मिकों को हटा दिया जाता है

डूंगरपुर, राजसमंद, कोटा, उदयपुर सहित कई जिलो में ईमानदारी से कार्य कर रहे कार्मिकों को हटा दिया जाता है। एजेंसियों के खिलाफ कार्यवाही कि शिकायत कि जाती है जो सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही इन एजेंसियों पर नहीं की जाती। जबकि हाईकोर्ट के आदेश है कि प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से कार्य कर रहे कार्मिकों को बदलकर नया कार्मिक नहीं लगाया जा सकता फिर भी संबंधित विभाग अधिकारी और एजेंसियों द्वारा कार्मिकों का शोषण किया जा रहा है।

रविन्द्र सिंह भाटी द्वारा विधानसभा में रखा गया लेकिन कोई बडी कार्यवाही आज तक नहीं हुई

एजेंसियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा सदस्य विधायक रविन्द्र सिंह भाटी द्वारा विधानसभा में रखा गया लेकिन कोई बडी कार्यवाही आज तक नहीं हुई। ना ही इस पर अंकुश लगा और जब एजेंसियों के खिलाफ शिकायत कि जाती है तो एजेंसियों द्वारा कार्मिकों को हटा दिया जाता है क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलना गलत है।

कई बार मुख्यमंत्री स्तर पर भी शिकायत की गई जब मुख्यमंत्री से उस मांग पर कार्यवाही के लिए संबंधित चिकित्सालय में फाईल जाती है तो अधिकारी भी एजेंसियों के पक्ष में ही जवाब दिये जाते है।चिकित्सा विभाग द्वारा एजेंसियों के कार्मिकों CSR रूल्स 2022 और RLSDC में शामिल करने को लेकर सूची मांगी गई सूची भिजवाने के बाद भी आज प्रक्रिया अधूरी है। प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप चौधरी ने मीडिया के माध्यम से राजस्थान सरकार से मांग करी कि इन कार्मिकों कि पीडा को समझना चाहिए और मांगों को संज्ञान में लेना चाहिऐ।



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