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सिरोही में जैन संत चैतन्य मुनि महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
सिरोही में आयोजित कार्यक्रम में जैन संत चैतन्य मुनि महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जीवन की राह कभी सीधी नहीं होती। इसमें उतार-चढ़ाव और अनेक मोड़ आते हैं।
महाराज ने समझाया कि जीवन का रास्ता कभी टेढ़ा-मेढ़ा लगता है, तो कभी कठिनाइयों से भरा होता है। लेकिन यह राह एक ही है, जो मंजिल तक पहुंचाती है। कठिनाइयां हमें रोकने नहीं, बल्कि मजबूत बनाने के लिए आती हैं।
उन्होंने बताया कि जैसे घने बादल सूर्य को कुछ समय के लिए ढक लेते हैं, वैसे ही जीवन की बाधाएं भी अस्थायी होती हैं। संयम की नौका जब जीवन-समुद्र में चलती है, तब आने वाले तूफान श्रद्धा और धैर्य को डिगाने का प्रयास करते हैं।
महाराज ने कहा कि यदि हमारी पतवार श्रद्धा और विश्वास से बनी हो, तो कोई तूफान नौका को नहीं डुबो सकता। कर्म का उदय भी कई बार सामने चुनौती बनकर खड़ा होता है, लेकिन श्रद्धा और ज्ञान का कवच हमारी रक्षा करता है।
उन्होंने समझाया कि वास्तविक सुरक्षा बाहर से नहीं, भीतर से मिलती है। संयम, श्रद्धा और ज्ञान का सहारा हमें मंजिल तक पहुंचाता है। साथ ही उन्होंने दान के पांच भूषणों की महत्ता पर भी प्रकाश डाला। जिस तरह सुंदर कपड़े और आभूषण व्यक्ति की शोभा बढ़ाते हैं, उसी तरह ये पांच भूषण दान की शोभा को कई गुना बढ़ा देते हैं।
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