सीकर के रैवासा धाम में श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए पंडित इंद्रेश उपाध्याय।
सीकर के रैवासा धाम में चल रहे 9 दिवसीय ‘सियपिय मिलन महोत्सव’ में (रविवार) को श्रीमद् भागवत कथा का छठा दिन भक्ति और आनंद से सराबोर रहा। प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने संगीतमय शैली में श्री कृष्ण जन्मोत्सव और पूतना वध की कथा सुनाकर श्रद्धा

रैवासा धाम के अग्रमलूकपीठाधीश्वर राजेंद्र दास देवाचार्य महाराज से चर्चा करते हुए प्रसिद्ध कथावाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय।
कृष्ण जन्मोत्सव और पूतना वध का वर्णन
कथा में पंडित इंद्रेश उपाध्याय ने श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का जीवंत चित्रण किया। उन्होंने बताया कि कैसे नंद बाबा वासुदेव जी को बधाई देने मथुरा गए। उसी समय राक्षसी पूतना ने सुंदर रूप धारण कर ब्रजमंडल में प्रवेश किया। पूतना ने कालकूट विष लगाकर नवजात बालकों को नष्ट करने की योजना बनाई थी, लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने उसे मुक्ति प्रदान की। कथा वाचक ने पूतना को भक्ति में आने वाली बाधाओं का प्रतीक बताते हुए कहा- जब हम भजन या कथा में डूबे होते हैं, तब कोई न कोई विक्षेप हमारे मन को भटकाने आता है। यही पूतना है। हमें सतर्क रहकर भक्ति में लीन रहना चाहिए।
जयपुर को बताया ‘बड़ा वृंदावन’ पंडित इंद्रेश ने जयपुर की भक्ति भावना की तारीफ करते हुए कहा,- लोग जयपुर को छोटी काशी कहते हैं, लेकिन यह तो बड़ा वृंदावन है। यहां के लोग श्री गोविंद देव जी से इतना प्रेम करते हैं कि बाहरी दर्शनार्थियों से ज्यादा स्थानीय लोग ही मंदिर में उमड़ते हैं। यह देखकर हृदय को बड़ा सुख मिलता है। उन्होंने जगन्नाथ पुरी और द्वारिका जैसे तीर्थों की तुलना में जयपुर के भक्तों के प्रेम को अनूठा बताया।

कथावाचक पंडित इंद्रेश उपाध्याय जयपुर के गोविंददेव जी मंदिर व गिरधरलाल जी मंदिर में आयोजित हुए अभिषेक उत्सव में शामिल हुए।
गोविंददेव और गिरधरलाल का अभिषेक किया
कथा के बीच पंडित ने बताया कि बीती रात श्री गोविंद देव जी का अभिषेक दर्शन हुआ। वहीं सुबह जयपुर में प्यारे गिरधरलाल जी का अभिषेक महोत्सव बड़े उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान ठाकुर जी की छठी का उत्सव भी भक्तों ने बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया।
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