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एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान किताब में एक मानचित्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पुस्तक में यूनिट-3 के पृष्ठ 71 पर दिए गए मानचित्र में भरतपुर रियासत को मराठा साम्राज्य का हिस्सा दिखाया है। जिस पर पूरे क्षेत्र में जबरदस्त विरोध है।

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सच्चाई यह है कि जाट रियासत के मराठाओं से खट्टे मीठे संबंध रहे। अधीनता नहीं स्वीकारी, बल्कि 1761 में अहमदशाह अब्दाली के साथ हुए पानीपत युद्ध में पराजय के बाद घायल मराठाओं और उनकी महिलाओं को जाट रियासत ने आश्रय दिया। घायलों का उपचार, भोजन, कपड़े सहित तमाम तरह की इमदाद दी। करीब 30 लाख रुपए खर्च किए। जाट सेना चंबल पार तक सुरक्षित छोड़कर आई। 600 से ज्यादा सैनिकों को महिला-बच्चों की सुरक्षा बाबत पूना और नासिक तक भेजा गया। जिनमें कई सैनिक वहीं बस गए। नासिक में सिनसिनवार जाटों के आज भी कुछ गांव हैं।

इतिहासकार रामवीर सिंह वर्मा बताते हैं कि करीब 31 गावों में जाटों की आबादी है। इतिहास की जानकार डॉ. सुधा सिंह कहती हैं महाराजा सूरजमल सिर्फ भरतपुर के नहीं, पूरे उत्तर भारत के स्वाभिमान थे। एनसीईआरटी किताब में भरतपुर को गायब करना तथ्यों से छेड़छाड़ है। रियासत के नक्शे में कहीं जिक्र नहीं है। षड्यंत्र के तहत इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। भरतपुर कभी मराठा साम्राज्य का हिस्सा नहीं था।

  • नोटिफिकेशन में दिखाया अलग… भरतपुर रियासत के गजट नोटिफिकेशन में भरतपुर राज्य का नक्शा भी है, जिसमें चंबल से लेकर यमुना तट तक के इलाके को दर्शाया है। नक्शा 1756 से 1768 ई. का है। इसमें झज्जर, फरखनगर, बल्लभगढ़, रेवाड़ी, नारनौल, पलवल, होडल, अलवर, बस्वा, सरमथुरा, इद्रगढ़, औरई, कालपी, जालौन, भिंड, इटावा, मैनपुरी, एटा, हाथरस, अलीगढ़ आदि इलाकों को दिखाया गया है।

एनसीईआरटी की नई किताब में जाट रियासत को मराठों साम्राज्य में बताया

  • सांघी में भाऊ का मकबरा… हरियाणा में रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि 1761 में पानीपत की लड़ाई अहमद शाह अब्दाली के साथ हुई, जिसमें महाराजा सूरजमल मराठों के साथ थे। युद्ध में मराठा सेनापति सदाशिवराव भाऊ हार गए, तब हरियाणा के सांघी गांव में अज्ञातवास में रहे। उनका मक़बरा अभी भी वहां मौजूद है, जिसे भाऊ का मक़बरा कहा जाता है।

दो प्रमाण…. गांगरसोली और शमशेर बहादुर का मकबरा

1. गागरसोली… 1754 में मराठा फौज की हार का गवाह: दिल्ली के मीर बख्शी के उकसावे पर मराठा पेशवा प्रतिनिधि मल्हार राव होल्कर के पुत्र खांडेराव ने 20 जनवरी 1754 को कुम्हेर किले की घेराबंद की। गांव गागरसोली में कैंप डाला। इतिहासकार उपेंद्र नाथ शर्मा ने लिखा है कि 15 मार्च को खांडेराव गोलाबारी में मारा गया। इससे मराठों के यश को काफी क्षति हुई।

2. मस्तानी सराय के सामने शमशेर बहादुर की कब्र

पेशवा बाजीराव और मस्तानी के पुत्र शमशेर बहादुर ने पानीपत युद्ध में भाग लिया। घायल होने पर भरतपुर आए। लेकिन बच नहीं सके। उन्हें मथुरा गेट स्थित मस्तानी की सराय के ठीक सामने दफनाया गया। यह अब मस्जिद शमशेर बहादुर के नाम से ख्यात है।

पुस्तकें जिनमें है जिक्र…

  • भरतपुर का इतिहास… पृष्ठ संख्या 49-50, चैप्टर-भारतीय संस्कृति का रक्षक महाराजा सूरजमल, लेखक-रामवीर सिंह वर्मा
  • ब्रजेंद्र बहादुर महाराजा सूरजमल जाट… पृष्ठ संख्या 194-235, चैप्टर-कुंवर बहादुर राजेंद्र सूरजमल का मुगल मराठों से युद्ध, पृष्ठ संख्या 236-288, चैप्टर- इमाद और मराठों से संघर्ष: राज्य विस्तार, लेखक-उपेंद्र नाथ शर्मा
  • लोहागढ़ की यशोगाथा… पृष्ठ 165-170, चैप्टर मराठों के साथ संबंध, लेखक- रामवीर सिंह वर्मा
  • अन्य पुस्तकें- ठाकुर देशराजसिंह, गंगीसिंह, कुं. नटवरसिंह, जाटों का गौरवशाली इतिहास के लेखक- रामवीर वर्मा आदि भरतपुर को स्वतंत्र रियासत बताया है।

इतिहास से छेड़छाड़ करना गलत: कृष्णेंद्र कौर दीपा “ऐतिहासिक सच्चाई यह है कि भरतपुर कभी भी मराठा साम्राज्य का हिस्सा नहीं रहा। 1759 में भरतपुर एक स्वतंत्र जाट रियासत थी। महाराजा सूरजमल भरतपुर रियासत के शासक थे। पानीपत युद्ध में मराठों की मदद की।”



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