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राजकीय महाविद्यालय बाड़मेर में बुधवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उच्च शिक्षा राजस्थान की महाविद्यालय इकाई के तत्वावधान में नीति से परिवर्तन तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पांच वर्ष विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की पांच वर्षों की उपलब्धियों, क्रियान्वयन, चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. उम्मेद सिंह ने उद्घाटन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि यह भारत की युवा शक्ति को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाने की रणनीति है। यह नीति आत्मनिर्भरता, नैतिकता और राष्ट्रनिर्माण की भावना से छात्र-छात्राओं को जोड़ती है।
मुख्य वक्ता सहायक आचार्य जितेन्द्र कुमार बोहरा ने कहा कि यह नीति शिक्षा को समावेशी, बहुभाषिक, बहु-विषयक और नवाचार परक बनाती है। उन्होंने क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट, एबीसी आईडी, स्किल कोर्सेस और रिसर्च ओरिएंटेड एजुकेशन जैसे बिंदुओं पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों को केंद्र में रखकर कौशल आधारित और मातृभाषा को प्राथमिकता देने वाली दिशा तय करती है। एबीआरएसएम के विभाग संयोजक मांगीलाल जैन ने कहा कि यह नीति भारत की परंपरागत शिक्षा प्रणाली और आधुनिक विज्ञान का सुंदर समन्वय है। यह छात्रों को सोचने, चुनने और नवाचार करने की स्वतंत्रता देती है।
जिला उपाध्यक्ष वीरसिंह ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि छात्रों को जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम बनाना है। यह शिक्षा प्रणाली को औपचारिकता से निकाल कर वास्तविकता की दिशा में ले जाती है। कार्यक्रम का संचालन जिला सचिव डॉ. खगेंद्र कुमार ने किया। धन्यवाद इकाई सचिव कानराज पूनिया ने व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर जिला सह-सचिव दीपक कुमार, प्रो. सोहनलाल, मृणाली चौहान, हेमलता ओझा, संतोष गढ़वीर, नवलकिशोर, सीपी घारू सहित सभी संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
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