चित्तौड़गढ़ जिले में हर साल की तरह इस बार भी गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त को बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। इस उत्सव को लेकर तैयारियां ज़ोरों पर हैं। शहर के अलग-अलग गणपति मंडलों ने गणेश मूर्तियां बनवाना भी शुरू कर दिया है। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी
हर साल प्रशासन की तरफ से मूर्तियों की एक निर्धारित ऊंचाई तय की जाती है ताकि अनंत चतुर्दशी के समय जुलूस के दौरान बिजली की लाइनों में कोई दिक्कत न हो। लेकिन अक्सर गणपति मंडल तय ऊंचाई से ज्यादा ऊंची मूर्तियां बना लेते हैं। इससे जब मूर्तियों के साथ जुलूस निकलता है, तो बिजली की लाइनें नीचे होने के कारण बिजली आपूर्ति कई बार बंद करनी पड़ती है। इससे पूरे शहर की बिजली व्यवस्था प्रभावित होती है और बिजली विभाग को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
17 फीट से ज्यादा ना हो मूर्तियों की ऊंचाई
इस समस्या को देखते हुए बिजली विभाग के सहायक अभियंता (एईएन) परमेंद्र चौधरी ने उपखंड अधिकारी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने सुझाव दिया है कि गणेश प्रतिमाओं की ऊंचाई गाड़ी सहित अधिकतम 17 फीट रखी जाए, ताकि बिजली की लाइनें सुरक्षित रहें और किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
चित्तौड़गढ़ में गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक गणपति उत्सव बड़ी धूमधाम और श्रद्धा से मनाया जाता है। इस दौरान शहर के कोने-कोने से गणपति की झांकियां और मूर्तियां जुलूस के रूप में निकलती हैं। यह जुलूस पहले गांधी चौक पर इकट्ठा होता है, फिर नाचते-गाते हुए गोल प्याऊ चौराहे होते हुए गंभीरी नदी के तट तक पहुंचता है, जहां प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
ज्यादा ऊंची मूर्तियों से हो सकता है खतरा, ऊंचाई को करे नियंत्रण
बिजली विभाग के अनुसार इंडियन इलेक्ट्रिसिटी रूल्स 2003 के अनुसार बिजली की लाइनें 17 फीट की ऊंचाई तक ही सुरक्षित मानी जाती हैं। लेकिन कंपटीशन के चलते मूर्तियां जब 22-23 फीट तक बनाई जाती हैं और गाड़ी पर रखकर जुलूस में निकाली जाती हैं, तो उनकी कुल ऊंचाई 25 फीट तक पहुंच जाती है। इससे बिजली की लाइनों से टकराने का खतरा बढ़ जाता है।
परमेंद्र चौधरी ने बताया कि हर साल विभाग की ओर से यह जानकारी दी जाती है कि यदि तारों को जबरन हटाया गया तो वे आपस में टकराकर ब्लास्ट कर सकते हैं। इससे बिजली कर्मचारियों के साथ-साथ आम जनता की जान को भी खतरा हो सकता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि बिजली निगम की लाइन को 19 फीट से ज्यादा ऊंचाई तक उठाना संभव नहीं है।

मूर्तियों की हाइट को लेकर हर बार इस तरह की दुविधा होती है।
जनरेटर से हो अस्थाई बिजली की व्यवस्था
सहायक अभियंता ने यह भी बताया कि झांकियों की सुरक्षा के लिए हर बड़ी प्रतिमा के साथ दो लाइनमैन तैनात किए जाते हैं, जो जरूरत पड़ने पर बिजली की आपूर्ति बंद कर सकते हैं। लेकिन यह तभी संभव है जब पहले से विभाग को जानकारी दे दी जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि गांधी चौक से गोल प्याऊ और अप्सरा टॉकीज तक जनरेटर से अस्थाई बिजली की व्यवस्था की जाए, ताकि बिजली बंद होने पर भी रोशनी बनी रहे और किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
इंटरनेट और केबल कंपनियों को भी दिया सुझाव
सिर्फ बिजली ही नहीं, इंटरनेट, जियो और अन्य केबल कंपनियों की लाइनें भी जुलूस के मार्ग में बाधा बनती हैं। इस कारण परमेंद्र चौधरी ने यह भी सुझाव दिया है कि इन कंपनियों को निर्देशित किया जाए कि उनके कर्मचारी मौके पर मौजूद रहें और जरूरत पड़ने पर अपनी लाइनों को ऊंचा कर सकें, ताकि जुलूस बिना किसी परेशानी के निकल सके।
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