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आयुर्वेद निदेशालय ने मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (मा) में अपने 84 आयुर्वेदिक औषधालयों को जोड़ने का आदेश जारी किया है। इन औषधालयों पर 20 पैकेज में शामिल 385 तरह के उपचार किए जाएंगे। लेकिन, हकीकत यह है कि इनमें से अधिकांश अस्पताल तय पैकेज के अनुस
उदयपुर जिले के 4 आयुर्वेदिक अस्पतालों को भी इसमें जोड़ा गया है। मदन मोहन मालवीय राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय आयड़, मावली और सायरा। जांच में सामने आया कि इनमें से तीन अस्पतालों के पास पैकेज के उपचार की सुविधा ही नहीं है। सबसे बड़ा संस्थान मालवीय आयुर्वेद महाविद्यालय को योजना को शामिल करने की जानकारी तक नहीं है।
स्पष्ट है कि बिना पर्याप्त स्टाफ और संसाधन इन केंद्रों पर 20 पैकेज में शामिल 385 तरह के उपचार संभव ही नहीं। बता दें कि बजट 2025–26 में सरकार ने घोषणा की थी कि आयुष्मान योजना में आयुर्वेद पैकेज जोड़े जाएंगे। इसी के तहत जयपुर, जोधपुर और कोटा संभाग के कुछ बड़े औषधालयों में काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन उदयपुर समेत अधिकांश जिलों में हालात पूरी तरह विपरीत हैं।
नियम… बेड-स्टाफ-पंचकर्म सुविधा जरूरी, फिर मंजूरी कैसे?
- सायरा : 4 में से केवल 1 चिकित्सक कार्यरत, परिचारक के सभी पद रिक्त।
- मावली : 3 में से 2 चिकित्सक, कंपाउंडर-परिचारक के आधे पद खाली।
- आयड़ : 4 चिकित्सक तो हैं लेकिन कंपाउंडर और मसाजर उपलब्ध नहीं।
संभाग में 14 अस्पताल जुड़े
उदयपुर संभाग में 14 औषधालय योजना से जोड़े गए हैं उदयपुर में 4, राजसमंद में 2, बांसवाड़ा में 2, डूंगरपुर में 3, चित्तौड़गढ़ में 2 और प्रतापगढ़ में 1 हैं। जबकि राज्य भर में कुल 84 औषधालयों को सूची में शामिल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा देने का सुनहरा मौका था, लेकिन बिना तैयारी इसे शुरू कर दिया गया। हालात यह है कि मरीजों को न तो तय पैकेज का लाभ मिलेगा और न ही बीमा कंपनी भुगतान करेगी। सवाल यह भी है कि सरकार ने गाइडलाइन में बेड, स्टाफ और पंचकर्म की सुविधा अनिवार्य बताई थी, तो फिर उन अस्पतालों को सूची में शामिल क्यों किया गया जहां ये सुविधाएं हैं ही नहीं।
आयुर्वेद कॉलेज तो योजना से ही अनजान मा योजना से उदयपुर स्थित राज्य के प्रमुख मदन मोहन मालवीय राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय को भी जोड़ा गया है। लेकिन, यहां के प्राचार्य डॉ. अशोक शर्मा को इसकी जानकारी ही नहीं है। उनका कहना है, “योजना की जानकारी तो है, लेकिन उनके महाविद्यालय को उपचार की स्वीकृति अभी नहीं मिली। स्वीकृति के बाद ही शुरुआत करेंगे।
25 लाख तक का कैशलेस इलाज, 20 पैकेज में 385 तरह के उपचार होंगे मा योजना के तहत मरीजों को 25 लाख रुपए का कैशलेस बीमा कवरेज मिलेगा। इसके लिए आयुर्वेद निदेशालय ने 20 पैकेज बनाए हैं, जिनमें पंचकर्म समेत 385 तरह के उपचार शामिल हैं। गाइडलाइन के अनुसार अस्पतालों में कम से कम 5 बेड, आईपीडी और पंचकर्म सुविधा होना जरूरी है। लेकिन, हकीकत यह है कि अधिकांश केंद्रों के पास न तो पर्याप्त बिस्तर हैं, न ही प्रशिक्षित स्टाफ।
अस्पताल का कायाकल्प करने मा से जोड़ा, इलाज नहीं तो राशि कैसे मिलेगी? योजना पर सवाल उठे तो आयुर्वेद निदेशालय ने जिम्मेदारी अस्पतालों पर डाल दी। निदेशक डॉ. आनंदकुमार शर्मा का कहना है कि संसाधनों की जरूरत और अनुमानित राशि भेजने को कहा गया है। योजना से मिलने वाली राशि आरोग्य समितियों में जाएगी, जिससे अस्पतालों का कायाकल्प होगा। लेकिन, शर्मा यह नहीं बता पाए कि जब मरीज को इलाज ही नहीं मिलेगा तो इश्योरेंस कंपनी पैसे कहां से देगी।
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