![]()
बछामदी गांव के देवेंद्र झा पिछले 15 साल से सांपों को रेस्क्यू कर रहे हैं। उनके पास कोई स्नेक कैचर स्टिक भी नहीं है, लेकिन वह डंडी, लकड़ी और लाठी के सहारे ही सांपों को पकड़ लेते हैं।वह कहते हैं कि सभी सांप खतरनाक नहीं होते, लेकिन सांपों की जानकारी न ह
एक सांप निकला, जिसे लोगों ने ईंट-पत्थर मारे। बचने के लिए वह एक नाली में घुस गया और गर्दन को हिलाने लगा, जैसे वह कह रहा हो कि “मुझे मत मारो”। सांप की हत्या ने मुझे विचलित कर दिया।कुछ दिन बाद हमारे घर के बाहर एक सांप और दिखा, लेकिन इस बार मैंने उसे मारने नहीं दिया, बल्कि डंडी के सहारे उसे प्लास्टिक कट्टे में पैक कर नहर के पार छोड़ आया। उसके बाद मेरी झिझक खुल गई। सांपों को रेस्क्यू करने में मजा आने लगा।
लोग फोन करते हैं तो तुरंत पहुंचकर रेस्क्यू करता हूं। यह मेरे लिए अब दोहरी सेवा है — एक तो सांप को बचाना और दूसरे लोगों का डर कम करना।देवेंद्र झा कहते हैं कि चौमासे में बिलों में बरसात का पानी भर जाने के कारण सांप सुरक्षित स्थानों की तलाश में रहते हैं। कोशिश उनकी जंगल की होती है, लेकिन कई बार भटक कर घर, आंगन और मोहल्लों में आ जाते हैं। यही उनके लिए खतरनाक कदम साबित होता है। सांप को जब डर लगता है तभी वह डसता है। इसलिए सांप दिखाई दे तो उसे निकलने का रास्ता दें अथवा प्लास्टिक के कट्टे, डब्बे आदि में डंडे के सहारे पैक कर लें और जंगल में छोड़ दें। जिले में इस सीजन में सर्पदंश की करीब 187 घटनाएं हो चुकी हैं।
कोबरा, वाइपर और कॉमन करैत प्रजाति के सांप सबसे ज्यादा घातक
विश्व में सांपों की 2 हजार से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 300 से ज्यादा प्रजाति के सांप भारत में देखे गए हैं। केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान, घना में 27 प्रजाति के सांप पाए गए हैं। वन्यजीव फोटोग्राफर डीडी शर्मा ने बताया कि सबसे अधिक वाटर स्नेक/पनियल सांप, रैट स्नेक/धामन और रॉक इंडियन पाइथन/चितकबरा अजगर पाए जाते हैं। इसके अलावा भरतपुर क्षेत्र में कोबरा, कॉमन करैत और वाइपर भी मिलते हैं। ये तीनों खतरनाक हैं।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments