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प्रतियोगी परीक्षाओं में अब किसी भी विद्यार्थी को उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर वंचित नहीं किया जाएगा। इस संबंध में सोमवार को हनुमानगढ़ में राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य हरदीपसिंह चहल ने जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर गुरसिख विद्यार्थियों को उनके पांच ककार, हिन्दू विद्यार्थियों को जनेऊ तथा महिलाओं को मंगलसूत्र धारण कर आने से कोई भी अधिकारी रोक-टोक न करें। शिक्षा का अधिकार सभी को समान रूप से मिलना चाहिए और धार्मिक प्रतीकों के कारण किसी को परीक्षा से वंचित करना संविधान के मूल्यों के विपरीत है।

गौरतलब है कि गत वर्ष कुछ गुरसिख विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान उनके धार्मिक प्रतीकों के कारण प्रवेश से रोका गया था, जिससे पूरे सिख समाज में आक्रोश व्याप्त था। चहल ने इस मुद्दे को उच्च न्यायालय तक पहुंचाया और उनके प्रयासों से न्यायालय एवं राज्य सरकार ने सिख विद्यार्थियों को ककार सहित परीक्षा देने की अनुमति दी। अब आगामी 7 से 12 सितंबर तक आयोजित होने वाली द्वितीय श्रेणी भर्ती परीक्षा में भी इस आदेश की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक के दौरान हरदीप सिंह चहल ने कहा कि यदि किसी परीक्षा केंद्र पर इन आदेशों का उल्लंघन हुआ तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समाज के बच्चों के आत्मविश्वास को मजबूत करना आयोग की जिम्मेदारी है और इस दिशा में किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में मदरसों को पुस्तकों की आपूर्ति के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। चहल ने कहा कि इन पुस्तकों का वितरण ब्लॉक स्तर पर कैम्प लगाकर किया जाए, ताकि दूरदराज के मदरसों को मुख्यालय तक आकर परेशान न होना पड़े। ज्ञात रहे कि पहले इन पुस्तकों का वितरण शिक्षा विभाग के माध्यम से किया जाता था, परंतु वर्तमान में यह जिम्मेदारी अल्पसंख्यक विभाग के पास है। इस बदलाव के बाद खासकर नोहर और भादरा क्षेत्र के लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए चहल ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों को असुविधा न हो, इसके लिए कैम्प आधारित वितरण प्रणाली को तुरंत लागू किया जाए। बैठक के बाद अल्पसंख्यक आयोग सदस्य ने समाज के प्रतिनिधियों से संवाद भी किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि आयोग हर स्तर पर उनके अधिकारों की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए कि शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो।

सिख समाज सहित अन्य अल्पसंख्यक वर्गों ने इस निर्णय का स्वागत किया है और कहा कि यह कदम न केवल धार्मिक स्वतंत्रता को सशक्त करेगा बल्कि बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ाएगा। इस मौके पर सुखा सिंह मेहताब सिंह गुरद्वारा के मुख्य सेवादार बाबा जग्गा सिंह, प्रीतम सिंह मान, बलकरण सिंह ढिल्लो, बलदेव सिंह रामगढ़िया, नक्षत्र सिंह, इंद्र सिंह, जरनैल सिंह, मेजर सिंह, कर्मजीत सिंह, शाहरूख खान, आमिर खान, गुरप्रीत सिंह, नरेंद्र गोदारा, लखवीर सिंह, जयराम ढूकिया, संदीप धालीवाल, रिछपाल मान, बूटा सिंह जवंधा, अशोक नंदा, थाना सिंह, जावेद टाक, अनंतराम, राजपाल, गणेशाराम, आशीष विश्नोई, निपेन शर्मा, सुनील वर्मा, वकील, देवेंद्र भोभिया, मनमोहन सोनी, ओम सोनी, मनीष मक्कासर, गुरमीत चंदड़ा मौजूद थे।



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