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जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में आग की घटना में आठ लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी। इधर, जयपुर की घटना के बाद कोटा में भी अस्पतालों की फायर सेफ्टी ऑडिट की गई। इस ऑडिट में सरकारी अस्पत

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अस्पतालों में निरीक्षण के लिए पहुंची टीम

अस्पतालों में निरीक्षण के लिए पहुंची टीम

मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि एमबीएस अस्पताल, जेके. लोन, न्यू जे. के. लोन अस्पताल, न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में टीमों ने निरीक्षण किया और वहां लगे फायर सेफ्टी उपकरणों की जांच की। निरीक्षण के दौरान एमबीएस अस्पताल में फायर अलार्म सिस्टम कार्यशील अवस्था में नहीं पाया गया। हौज बॉक्स में हौज पाइप नहीं लगे हुए थे। स्टोर रूम से इन्हें लाकर लगवाया गया। अग्निशमन कर्मचारी नियुक्त नहीं है और न ही फायर कंट्रोल रूम है। न्यू जेके लोन अस्पताल में अग्निशमन उपकरण स्थापित है तथा न्यू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में फायर सिस्टम कार्यशील अवस्था में पाया गया। तीनों अस्पतालों में अग्निशमन से संबंधित कुछ कमियां पाई गई। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन को 7 दिन में अग्निशमन उपकरण कार्यशील अवस्था में रखने के साथ-साथ प्रशिक्षित अग्निशमन कर्मचारी तैनात रखने, लूज वायरिंग दुरुस्त करवाने, वेंटिलेशन बनाए रखने तथा अस्पताल परिसर में अग्निशमन वाहन पहुंच मार्ग खुला रखने आवागमन में कोई अवरोध ना हो , फायर और पुलिस नियंत्रण कक्ष के नंबर भवन में अंकित किए जाने, चौबीस घंटे इलेक्ट्रीशियन और फायर प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात रखने के लिए निर्देश दिए गए।



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