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26 सितंबर 2025; 6 जुलाई 2015 को रिंकी का एक्सीडेंट हुआ। आज पति और बेटियों के साथ नीरज से मिलीं।
कहानी 10 साल पुरानी है। सीनियर आईएएस नीरज पवन के चैंबर में रिंकी कंवर अपने पति और दो बेटियों के साथ आई हैं। मुस्कुराता परिवार शुक्रिया अदा कर रहा है नीरज का। उस दिन जिंदगी बचाने का। जब रिंकी एक्सीडेंट के बाद सड़क पर खून से लथपथ थी। लोगों की भीड़ जमा हो
डूंगरपुर से परिवार के साथ एसएमएस स्टेडियम में नीरज के चैंबर आई रिंकी कृतज्ञ भाव से उनका अभिनंदन कर रही हैं। रिंकी ने गुलदस्ता दिया और नीरजके पैर छुए। पति महिपाल सिंह बार बार शुक्रिया कह रहे हैं। बेटियां माता-पिता और नीरज को देख रही हैं, फिर नीरज को प्रणाम कर रही हैं। रिंकी ने बात शुरू की, बोलीं- 2015 में मैं पटवारी भर्ती की तैयारी कर रही थी। कोचिंग के लिए आमेर से लालकोठी आती थी। 6 जुलाई 15 की सुबह मेरा लालकोठी पर एक्सीडेंट हुआ। मैं डिवाइडर के पास गिर पड़ी। मुझे याद नहीं मैं अस्पताल कैसे पहुंची।
नीरज बताते हैं- मैं वहीं से गुजर रहा था। भीड़ लगी थी, लड़की घायल पड़ी थी। मैं अपनी गाड़ी से उसे हॉस्पिटल ले गया। मेरे कपड़े खून से सने थे। हॉस्पिटल स्टाफ ने मुझे नहीं पहचाना। मैं स्ट्रैचर खींचकर रिंकी को भर्ती कराया। ठीक बर्ताव नहीं करने पर स्टाफ के खिलाफ विभाग ने एक्शन लिया। रिंकी आज टीचर हैं। पति महिपाल भी टीचर हैं। भास्कर की मुहिम पढ़कर ही वे नीरज को धन्यवाद देने आए। बड़ी बेटी ने कहा- आप ना होते तो मैं भी ना होती।
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