नकली दवा बनाते पकड़ी गई कंपनियों को बचाने वाले अफसर को सस्पेंड कर दिया गया है। दैनिक भास्कर ने ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा द्वारा नकली दवाओं के आंकड़ों में हेरफेर के कारनामों को उजागर किया था। यह बताया था कि कैसे ड्रग डिपार्टमेंट का एक अधिकारी न सिर्
खबर प्रकाशित होने के कुछ घंटों बाद कार्रवाई करते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त शासन सचिव निशा मीणा ने एक आदेश जारी कर राजाराम शर्मा को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया। स्वास्थ्य विभाग ने एक अलग आदेश में सहायक औषधि नियंत्रक मनोज धीर को अपने कार्य के साथ-साथ औषधि नियंत्रक द्वितीय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है।
अब जानिए दैनिक भास्कर ने इस पूरे मामले में क्या खुलासा किया था? राजस्थान के फूड सेफ्टी ड्रग कंट्रोलर डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने नकली दवाओं को लेकर लोकसभा और नीति आयोग को अलग-अलग आंकड़े भेज दिए। इतना ही नहीं, विधानसभा में भी गलत आंकड़े भेजने की तैयारी थी। लेकिन उससे पहले विभागीय जांच में यह मामला पकड़ा गया।

भास्कर ने ड्रग कंट्रोलर द्वितीय राजाराम शर्मा की इन करतूतों का खुलासा करते हुए बताया था कि लोकसभा ने इसी साल मार्च में राजस्थान में पकड़ी गई नकली दवाओं को लेकर डीजीसीए (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) से सूचना मांगी थी। जिस पर प्रदेश के फूड सेफ्टी एंड ड्रग डिपार्टमेंट ने डीजीसीए को 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2024 तक 55 दवाओं को नकली मानकर सूचना भेजी। इसके कुछ महीने बाद ही जून, 2025 को नीति आयोग ने राजस्थान में पकड़ी गई नकली दवाओं की जानकारी मांगी। विभाग के अधिकारियों के अनुसार ड्रग डिपार्टमेंट ने नीति आयोग को साल 1 जनवरी 2022 से लेकर जून 2025 तक 60 नकली दवाओं की सूचना भेजी। लेकिन हमारी पड़ताल में सामने आया था कि नीति आयोग को नोटशीट (पीयूसी-4-सी) में जो आंकड़े भेजे गए थे, उसमें नकली दवाओं का आंकड़ा महज 39 था।

राजाराम शर्मा के सस्पेंशन ऑर्डर की कॉपी। स्वास्थ्य विभाग ने एक अलग आदेश में सहायक औषधि नियंत्रक मनोज धीर को उनकी जगह जिम्मेदारी दी है।
इसी तरह राजस्थान विधानसभा में लगे एक प्रश्न के जवाब के लिए मांगी गई यह जानकारी मांगी गई थी? लेकिन इस दौरान अचानक आंकड़ा कम हो गया। इसी टाइम पीरियड में ये डेटा सिर्फ 44 रह गया। जिसके बाद विधानसभा से आए प्रश्नों के जवाब पेश करने को लेकर ड्रग कंट्रोलर ने 19 सितंबर को मीटिंग रखी। इस मीटिंग में मौजूद अधिकारियों ने अपनी जांच में पाया कि ड्रग कंट्रोलर (द्वितीय) राजाराम शर्मा ने ई-फाइल क्रमांक Spurious Drug Listing For CSS-09302-7677196 {Para 4/N} में अपनी परिभाषा देते हुए टिप्पणी कर रखी थी। दरअसल, प्रदेश में नकली दवाओं को लेकर ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट,1940 बना हुआ है। इसमें स्पष्ट है कि किसी भी दवा में 3-4 या जितने भी सॉल्ट (रसायन) दर्शाए गए हैं, जांच में उनमें से एक भी नहीं मिलता है तो उस दवा को नकली ही माना जाएगा।

लेकिन राजाराम शर्मा ने उनमें से कई नकली दवाओं के आगे टिप्पणी करते हुए हटा दिया। उसमें नई परिभाषा लिख दी
‘यदि दवा में एक सॉल्ट को छोड़कर बाकी सभी घटक दावे के अनुसार हैं और निर्माता स्वंय स्वीकार करता है कि इसका निर्माण उसी ने किया है तो उसे नकली औषधी नहीं माना जाएगा।’
इस गलत व्याख्या के कारण नकली दवाओं का आंकड़ा कम हो गया, जिसे विधानसभा को जवाब के तौर पर भेजा जाना था। इतना ही नहीं ड्रग कंट्रोलर द्वितीय राजाराम शर्मा ने यह नोट सहायक औषधि नियंत्रक मुख्यालय (एडिशनल ड्रग कंट्रोलर) को भिजवाया और इसे विधानसभा में भेजी जाने वाली आधिकारिक नोटशीट में बदलने के निर्देश दिए। भास्कर ने इस मामले में लोकसभा में पेश किया जवाब,नीति आयोग को भेजे गए जवाब की नोटशीट जुटाकर पूरे मामले का खुलासा किया।
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कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद बड़ा खुलासा:राजस्थान के बड़े अफसर पर आरोप- नकली दवाओं की परिभाषा बदली, फार्मा कंपनियों को बचाया

सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली कफ सिरप पीने से 2 बच्चों की मौत के साथ ही तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। जिस विभाग पर ऐसी एक्शन लेने का जिम्मा है, उसी के अधिकारी फार्मा कंपनियों को बचाने में जुटे हैं…(CLICK कर पढ़ें)
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