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13 सितंबर 2025; दीपा ने लोकेंद्र को पहचाना, खुश हो गई।

भास्कर संवाददाता भरतपुर में अरसे बाद इनकी प्यारभरी मुलाकात का गवाह बना। ये जो तीनों मासूम खिलखिला रहे हैं वे अनाथ हैं। 2022 में मजदूर मां-बाप की एक्सीडेंट में मौत हो गई। उस बाइक पर ये तीनों बच्चे भी मां-बाप की गोद में थे, लेकिन ईश्वर ने इन्हें जिंदगी

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हम इस वक्त नदबई भरतपुर में गांव खांगरी में दूर खेतों में झोपड़नुमा घर में हैं। चाचा के साथ तीनों बच्चे तंगहाली में रहते हैं। दो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ने जा रहे हैं। इन बच्चों के चाचा बताते हैं-भाई-भाभी तीनों बच्चों के साथ बाइक पर मजदूरी के लिए जा रहे थे। बेलारा के पास पिकअप ने टक्कर मारी। भाई-भाभी की मौत हो गई। तीनों बच्चे सड़क पर थे। दीपा और कुंवर को गंभीर चोटें आई थीं।

उस वक्त आप (लोकेंद्र) ना होते तो जाने क्या हो जाता। आरबीएम हास्पिटल में बच्चों को ले जाने, भर्ती कराने और उनके ठीक होने तक हर रोज जो मदद आपने की, दोनों बच्चों की जिंदगी बचाने में उस मदद को हम कभी नहीं भूल सकते। आपने ना केवल मदद की, बल्कि उनके पालनहार बन गए हैं। उनकी दवा और खाने-पीने का ख्याल रखा। हाथ-पैर तक दबाए।

अहसास कराया कि मां-बाप जाने के बाद वो उनके साथ हैं। अब तीन साल बाद एक बार फिर आप (लोकेंद्र) सामने हैं, जैसे भगवान आए हैं। उन्हें प्यार से टोकते हुए लोकेंद्र ने कहा- इंसान होने के नाते मेरा फर्ज था। जब भी जरूरत होगी मैं हमेशा हूं। दीपा बोली- वो एक्सीडेंट याद है, अंकल! आप ना होते तो हम भी ना बचते।



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