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चंबल की आधी अधूरी 40 किमी लंबी नहर के 64 करोड़ रुपए का भुगतान अधिकारियों ने बिना जांच पड़ताल के ही कर दिया। मौके पर जो काम हुआ ही नहीं उसको भी पूरा बता दिया। इटावा के फतेहपुरा से बागली खातौली तक बनी इस नहर के निर्माण में करीब छह साल लगे। ठेकेदार को फाय

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भास्कर ने 40 किमी लंबी इस नहर का स्थानीय लोगों के साथ मिलकर मौका देखा तो कमांड एरिया डेवलपमेंट (सीएडी) के इस पूरे काम की पोल खुल गई। बिना काम के ही एडवांस भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया, जो काम मशीनों से कराया जाना था, वह भी मजदूरों से कराया गया। इसके कारण नहर पुनर्निमाण की क्वालिटी भी प्रभावित हुई। पड़ताल में प्रारंभिक भ्रष्टाचार करीब 5 करोड़ का तो सामने आ गया है। अगर इस मामले की आगे और जांच होगी तो गड़बड़ी का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।

भास्कर इन्वेस्टिगेशन- माइनर का काम अधूरा, ठेकेदारों को पेमेंट पूरा

  • बेड लाइनिंग का 2023 में 23 लाख का भुगतान उठा लिया, कॉलर/पटरा का करीब 11 लाख का भुगतान हो चुका।

हकीकत- बेड लाइनिंग का काम अधूरा।

  • नवंबर 2023 में दोनों ओर सीसी डॉवल के कार्य का करीब 24 लाख का भुगतान किया गया।

हकीकत: दोनों ओर सीसी डॉवल नहीं बना।

अधूरे कामों के बिल पास

तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता विष्णु कुमार पर आरोप है कि उन्होंने खंडीय कार्यालय में सीधे बिल पेश कर भुगतान करवा दिया, जबकि काम पूरा नहीं हुआ था। विष्णू कुमार ने ही धरातल पर नाप-तौल​ किया है। इसमें एईएन द्वारा जांच निरीक्षण एवं एक्सईएन द्वारा भुगतान करवाया गया है।

25 लाख की 3 किमी नहर अधूरी

इटावा ब्रांच नहर के 39.790 किमी से 42.400 किमी तक दोनों ओर डॉवल का भुगतान पहले ही हो चुका। लेकिन मौके पर करीब 3 किलोमीटर लंबाई तक काम जगह-जगह अधूरा है। यह करीब 25 लाख का कार्य है। इस तरह पूरा काम बगैर​ मिलीभगत के बिना मुश्किल है।

चंबल ब्रांच का दायरा: 39 किमी से 66 किमी तक फैली यह ब्रांच इससे 10–12 बड़ी माइनरें और 3–4 वितरिकाएं जुड़ी हैं। असर – किसानों को आज भी नहर के अधूरेपन के कारण सिंचाई का पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। निजी साधनों से सिंचाई करने के कारण उनकी लागत बढ़ रही है। 64 करोड़ का प्रोजेक्ट किसानों के लिए अब तक अधूरा वादा ही साबित हुआ है।

जिम्मेदारों के ये जवाब

एसई के पास कोई जवाब नहीं “मेरे पास तो केवल प्रोग्रेस रिपोर्ट ही आती है। भुगतान डिवीजन स्तर से होता है। इस प्रोजेक्ट के लिए दायीं नहर उपखंड द्वितीय सीएडी इटावा की 40 किमी लंबी चंबल नहरों के लिए वर्ष 2017 में 64 करोड़ स्वीकृत हुए थे। जिसमें नहरों का पुनर्निमाण हुआ है।” – लखन लाल गुप्ता, एसई, सीएडी, कोटा

द्वेषता हैं इसलिए ऐसा कर रहे हैं “नहर का 40 किलोमीटर का कार्य पूरा किया गया है। उच्च अधिकारी उनसे द्वेषता रखते है। कुछ काम जैसे डिफेक्टिव पैनल को बाद में ठीक किया गया।” – विष्णु कुमार, तत्कालीन जेईएन,सीएडी कोटा

गड़बड़ियों की जांच चल रही है “तमाम गड़बड़ियों की एक टीम जांच कर रही है, इसमें कई अधिकारी हैं, रिपोर्ट आने पर दोषी अधिकारी के खिलाफ जांच होगी।” – हेमराज मीणा, अधिशासी अभियंता, दांई मुख्य नहर खण्ड द्वितीय, सीएडी इटावा



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