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एनएचएम के मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. अमित यादव ने मंगलवार को वीसी के माध्यम से साप्ताहिक बैठक में राजस्थान की 54 हजार आशा सहयोगिनी के मासिक क्लेम फॉर्म की मानिटरिंग और जांच के लिए कहा। इसके साथ ही आशा के गांवों में दौरे बढ़ाने पर जोर दिया गया। आयोजित कर
मिशन निदेशक ने प्रदेश में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व चार जांच सेवाएं उपलब्ध कराने में परिवहन के लिए 104 जननी एक्सप्रेस के सदुपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का फोलोअप करें ताकि उनका आगामी उपचार प्रबंधन समुचित हो सके। साथ ही, उन्होंने जननी सुरक्षा योजना के तहत दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि का शत प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने नवनियुक्त चिकित्सा अधिकारियों को आगामी 15 दिवस में आवश्यक प्रशिक्षण देने के भी निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि एनीमिक महिलाओं के लिए फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज इंजेक्शन सेवाएं संचालित की जा रही हैं। नियमानुसार कम हीमोग्लोबिन वाली महिलाओं को यह इंजेक्शन लगाए जाएं।
मिशन निदेशक ने कहा कि प्रदेश में 54 हजार से अधिक आशा सहयोगिनी कार्यरत हैं, जो गांव-ढाणी में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की प्रदायगी व मोबिलाइजेशन में एक महत्वपूर्ण कार्यकर्ता हैं। उन्होंने आशा द्वारा उनके किए गए कार्यों के आधार पर सबमिट किए जाने वाले मासिक क्लेम फॉर्म के सबमिशन की समीक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो आशाएं अपने क्लेम फॉर्म सबमिट नहीं करती हैं या कार्य नहीं कर पा रही हैं, उनके लिए ब्लॉक या सेक्टर स्तर पर नियमत रूप से समीक्षा बैठक आयोजित करें। इसी से समग्र रूप में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के सूचकांकों में सुधार परिलक्षित हो पाएगा।
अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला ने गर्भवती महिलाओं के समय पर रजिस्ट्रेशन, गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच करवाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने चार बार प्रसव पूर्व जांच के डेटा को भी समय पर अपडेट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी इलाकों में संस्थागत प्रसव पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए। संस्थागत प्रसव के मामले में कम प्रगति वाले वाले क्षेत्रों में अधिक प्रयास व सघन मॉनिटरिंग की जाए।
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