जोधपुर में इस बार मानसून सीजन में पिछले साल के मुकाबले अधिक बारिश हुई।
प्रदेश भर में इन दोनों मानसून विदाई ले चुका है। इस बार राजस्थान में मानसून सीजन में 514.2 MM बारिश हुई। पश्चिमी राजस्थान की बात की जाए तो इस बार मानसून करीब 7 से 8 दिन अधिक रहा। अमूमन यहां पर मानसून की विदाई 17 सितंबर के करीब होती है और इस बार यह 15
काजरी के मौसम विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरिमोहन मीणा ने इसको लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बार 26 से 28 जून के लगभग मानसून आ गया था। जो पिछले साल के मुकाबले 8 से 9 दिन पहले आया। इस बार जो मानसून रहा वो करीब 7/8 दिन ज्यादा रहा। पश्चिमी राजस्थान में मानसून की विदाई अमूमन 17 सितंबर के करीब होती है। इस बार 15से 16 सितंबर के बीच पश्चिमी राजस्थान से मानसून ने विदाई ली।

मानसून सीजन में किसानों को अगस्त माह में कम बारिश की वजह नुकसान उठाना पड़ा।
बारिश की बात की जाए तो पश्चिमी राजस्थान में औसतन 272.6 MM और जोधपुर में 330 MM के करीब बारिश मानसून सीजन में होती है। इस बार पश्चिमी राजस्थान में 474.5 MM, जोधपुर में 586 MM इस मानसून सीजन में हुई। इस तरह से पश्चिमी राजस्थान में इस बार 201 MM बारिश ज्यादा हुई है। वहीं जोधपुर में इस बार सामान्य से 256 MM बारिश ज्यादा हुई है।
इस बार बारिश में अगस्त माह में करीब 18 दिन का गैप रहा। 29 जुलाई से 15 अगस्त के बीच गैप रहा। इसी दौरान फसल की फ्लोरिंग सीजन होती है। इसके बाद जो बारिश हुई है वो बारिश हवा के साथ थी। कुछ इलाके ऐसे थे जहां पर खेतों में पानी भरने से मूंग की फसल काली पड़ गई, बाजरे की फसल को भी नुकसान पहुंचा। बाजरा गिर गया। इसके चलते करीब 20 से 25 प्रतिशत नुकसान का अंदेशा है।
सहायक कृषि अधिकारी विक्रम सिंह भाटी ने बताया कि जोधपुर जिले में 12 हजार 250 स्क्वायर किलोमीटर खेती का एरिया है। जिसमें खरीफ फसल का 12 लाख 50 हजार हेक्टेयर है, वहीं रबी का 4 लाख 50 हजार हेक्टेयर एरिया है। आमतौर पर यहां के किसान मूंग, मोठ, बाजरे, ग्वार, तिल की खेती करते हैं। हालांकि मोठ, ग्वार की फसल कम पानी में भी ज्यादा दिन तक सर्वाइव कर जाती है, लेकिन मोठ और ग्वार के भाव कम मिलने की वजह से किसान इन्हें उगाना कम पसंद करते हैं। जोधपुर जिले में अधिकतर बाजरा, मूंग की खेती की जाती है। इस फसल में पानी अधिक चाहिए होता है, इसलिए ज्यादा दिन तक बारिश नहीं होने पर ये फसल नष्ट होने लगती है। मूंग की फसल 85 दिन, मोठ 60 से 65 दिन की फसल होती है।
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments