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अपनी ही 11 साल की नाबालिग बेटी को देह व्यापार करने के लिए बेचने वाली मां को पोस्को संख्या-दो कोर्ट ने 10 साल की सजा व साढ़े 5 लाख रुपए जुर्माने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायाधीश शिल्पा समीर ने सुनाया।
विशिष्ठ लोक अभियोजक पंकज यादव ने बताया कि तत्कालीन सदर थाना इंचार्ज कैलाश चौधरी को 7 अगस्त 2016 को सूचना मिली थी कि गांव गाजूकी में बिल्लो नाम की एक महिला एक बच्ची को तस्करी कर लाई है, जिसे बंधक बना रखा है और उसे देह व्यापार में धकेला जा रहा है। पूछताछ में आसपास के लोगों से सूचना की पुष्टि की। सूचना सही पाए जाने पर आरोपी महिला बिल्लो के घर की तलाशी ली। वहां 11 साल की बच्ची मिली। पुलिस उसे थाने लाई। पूछताछ में बच्ची ने बताया कि उसे 6 माह पहले कोलकाता से यहां लाया गया था। बिल्लो उससे जबरदस्ती देह व्यापार कराती है। जांच के बाद अनुसंधान अधिकारी जितेंद्र नावरिया ने आरोपी महिला बिल्लो को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने बिल्लो को दोषी मानते हुए उसके खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट पेश की। बाद में न्यायालय ने 26 जुलाई 2019 को बिल्लो को 5 साल सजा सुनाई। लेकिन, मामले में आरोपी पीड़िता की मां व उसका सहयोगी फरार चल रहे थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अनुसंधान पेडिंग में रखा और दोनों की तलाश में जुटी रही। पुलिस ने पीड़िता की मां व उसके सहयोगी के न्यायालय से गिरफ्तारी वारंट प्राप्त किए। इसके बाद पुलिस ने 14 अगस्त 2023 को पीड़िता की मां को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार लिया।
अभियोजन पक्ष ने प्रकरण में 12 गवाह व 17 दस्तावेज प्रदर्शित कराए। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आरोपी मां को दोषी मानते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा और साढ़े पांच लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। जबकि, सहयोगी अभी फरार चल रहा है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
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