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जिंदगी बचाने वाली मानवीय मूल्यों से भरी आज की कहानी सोजत (पाली) और प्रयागराज से जुड़ी है। 1 नवंबर 2021 की उस रात हाइवे पर जिस खतरनाक एक्सीडेंट में मां और दो बेटियों की मौत हो गई थी, उसमें तीसरी बेटी को मौत के मुंह से खींच लाया गया। वो अनाथ हो गई क्यो
जागृति इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से लॉ कर रही है। जैसे ही जागृति को पता चला बचाने वाले अंकल हेमंत प्रयाग में हैं, वह मिलने दौड़ी चली आई। कुछ देर के लिए दोनों अवाक् रह गए। फिर खुशी के साथ मिले। पुरानी कहानी शुरू हुई… जागृति ने बताया- वे जोधपुर से दीपावली मनाने मुजफ्फरपुर जा रहे थे। मैं मां के साथ पीछे की सीट पर थी। दोनों बड़ी दीदी आगे। हमारा पप्पी भी साथ था। पाली के पास कार बेकाबू हो गई और हाइवे के साइन बोर्ड वाले खंभे से टकराई। फिर मुझे कुछ याद नहीं।
कहानी को हेमंत ने आगे बढ़ाया- मैं तब सोजत सीओ था। वहां से निकल रहा था। कार के परखच्चे उड़ गए थे। कार चला रही बड़ी बेटी के पेट में स्टेयरिंग घुस गया था। दरवाजे तोड़कर निकाला गया, वह दम तोड़ चुकी थी। दो बेटी और मां बेसुध थे। तीनों को अस्पताल ले गया। वहां जागृति को छोड वे दोनों भी चल बसीं। मां दिवंगत पिता की जगह नौकरी लगी थीं।
आज चार साल बाद- जागृति को यकीन नहीं हो रहा कि बचाने वाले अंकल उसके सामने हैं। जागृति ने हेमंत से पूछा- अंकल! अंतिम समय में मां-दीदी की आंखें खुली थीं क्या? सवाल सुनकर हेमंत की आंखें गीली हो गईं। जागृति बोली- शायद ऊपर वाले को यही मंजूर था, किसी का दोष नहीं। मेरे नाना-मामा ने साथ दिया, मैं उनकी ऋणी हूं।
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