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वेरिसेला जोस्टर से फैलने वाला हर्पीज जोस्टर वायरस बदल रहा है। कमजोर इम्यूनिटी के चलते डायबिटीज, कैंसर की कीमोथैरेपी कराने वाले मरीजों के बाद अब कोरोना संक्रमण से रिकवर हो चुके मरीज भी इसकी जकड़न में हैं। इसमें युवा, गर्भवती और बुजुर्ग सभी शामिल हैं।

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यानी पिछले दो माह में 400 मरीजों सामने आ चुके हैं। इनमें से 80 से 90% कमजोर इम्यूनिटी वाले हैं। दरअसल, हर्पीज जोस्टर इन्फेक्शन का वायरस शरीर में पहले से ही मौजूद होता है, लेकिन यह सुसुप्तावस्था में होता है। यानी, यह शरीर में तो मौजूद होता है, पर एक्टिव नहीं होता। जब शरीर कमजोर होता है और इम्यूनिटी मजबूत नहीं होती, तब नसों से होते हुए त्वचा में चला जाता है।

पिछले दो माह में 400 मरीजों सामने आ चुके हैं। फाइल फोटो।

पिछले दो माह में 400 मरीजों सामने आ चुके हैं। फाइल फोटो।

केस 1 कोरोना की चपेट में आने से कमजोर इम्यूनिटी के कारण विद्याधर नगर निवासी 30 वर्षीय स्वप्निल (बदला हुआ नाम) हर साल कोई न कोई परेशानी झेल रही है। अब गर्भवती हुई तो हाथों में तेज दर्द और बुखार होने पर पांच दिन तक नजरअंदाज किया, लेकिन बाएं हाथ में फफोले जैसे बन गए और जलन होने लगी। फिर एसएमएस अस्पताल में दिखाने पर डॉक्टरों ने हर्पीज जोस्टर बताया।

केस 2 खोरा निवासी जुगल (बदला नाम) के पांच दिन पहले शरीर में कमजोरी, तेज बुखार के साथ जलन हो रही थी। पहले तो पास के निजी अस्पताल में बुखार मानकर इलाज लेता रहा। मरीज के किडनी में और शुगर पहले से है। लगातार तेज दर्द का एहसास होने पर शास्त्री नगर स्थित कांवटिया अस्पताल में दिखाया। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर हर्पीज जोस्टर का इलाज चल रहा है।

वायरल संक्रमण है जो चिकन पॉक्स के वायरस, वेरिसेला जोस्टर के कारण होता है। फाइल फोटो।

वायरल संक्रमण है जो चिकन पॉक्स के वायरस, वेरिसेला जोस्टर के कारण होता है। फाइल फोटो।

शरीर में निष्क्रिय अवस्था में मौजूद रहता है वायरस डॉ. दीपक माथुर, डॉ. आर.एस. मीणा व डॉ. पुनीत अग्रवाल के अनुसार, हर्पीज जोस्टर, जिसे सिंगल्स भी कहा जाता है, एक वायरल संक्रमण है जो चिकन पॉक्स के वायरस, वेरिसेला जोस्टर के कारण होता है। इस संक्रमण में, शरीर में पहले असहनीय दर्द होता है, और फिर उसी जगह पर छोटे-छोटे दाने निकल आते हैं। डायबिटीज, कैंसर, टीबी और एचआईवी से पीड़ित मरीजों को इसका खतरा ज्यादा रहता है।

वायरस शरीर में निष्क्रिय अवस्था में मौजूद रहता है, लेकिन जब इम्युनिटी कम होती है, तो यह प्रभावी हो जाता है। इसके लक्षणों में चमड़ी पर लाल दाने उभर कर बड़े होना, मुंह, जीभ, गले, होंठ एवं मसूड़ों पर अल्सर, आंखों के आसपास फफोले, और चेहरे पर दाग और फफोले आदि शामिल हैं।



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