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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण पश्चिमी क्षेत्र की ओर से जयपुर में आयोजित वर्कशॉप में राजसमंद जिला मिनरल्स माइन्स वेलफेयर संस्थान के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
राजसमंद जिला मिनरल्स माइन्स वेलफेयर संस्थान की ओरऔर से संस्थान के अध्यक्ष नानालाल सार्दुल ने जयपुर में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण पश्चिमी क्षेत्र द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में भाग लिया। कार्यशाला के दौरान सार्दुल ने सुझाव देते हुए कहा कि ल
‘आकलन किए बिना नियम थोपे जाते है’ उन्होंने मिनरल्स माइंस से जुड़ी जटिल समस्याओं को उच्च अधिकारियों डायरेक्टर जनरल एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण पश्चिमी क्षेत्र के समक्ष रखते हुए कहा कि प्रत्येक माइनिंग विभाग में जियोलॉजिकल डिपार्टमेंट के अधिकारी होने के बावजूद सही सर्वे नहीं कराया जाता। इससे बिना वास्तविक स्थिति का आकलन किए बिना नियम थोपे जाते है, जिसका खामियाजा लीजधारकों को भुगतना पड़ता है।
संस्थान की ओर से मांग रखी गई कि मिनरल्स की वास्तविक जांच कर मेजर मिनरल्स को माइनर में वर्गीकृत किया जाए तथा फेल्सपार मिनरल्स को ए, बी, और सी श्रेणियों में विभाजित कर सी श्रेणी में शामिल किया जाए। साथ ही, ईसी समय पर न मिलना, माइनर को मेजर में बदल देना जैसी समस्याओं का भी समाधान मांगा गया।
नियमों का कड़ा विरोध जताया सार्दुल ने माइन सेफ्टी नियमों के अनुसार छोटी-छोटी पॉकेट डिपॉजिट की माइंस में मैनेजर, ब्लास्टर और तकनीकी कर्मियों की अनिवार्यता का कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इस नाराजगी को भारत सरकार और उच्च अधिकारियों तक सकारात्मक रिपोर्ट के माध्यम से पहुंचाने की बात कही।
कार्यशाला में भारत सरकार के सचिव द्वारा तकनीकी जानकारी, खनिज अन्वेषण की नवीन परियोजनाएं, फॉरेस्ट क्लियरेंस और गाइडलाइंस के बारे में जानकारी दी गई।कार्यशाला में राजसमंद से नानालाल सार्दुल, गोवर्धन राठौड़, जगदीश तेली और विनोद कुमार बागवान ने सहभागिता की।
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