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पिछले साल इसी फैक्ट्री पर डीआरआई की टीम ने की थी कार्रवाई। इसके तीन किमी तक एरिया सुनसान है, जहां किसी प्रकार की आवाजाही नहीं थी।

राजस्थान हाईकोर्ट ने बाड़मेर जिले के एक मादक पदार्थ मामले में डीआरआई द्वारा पकड़े गए आरोपी कालू सिंह को जमानत मंजूर की है। जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि FSL रिपोर्ट नेगेटिव आने और मुख्य आरोपियों के फरार होने की स्थिति में आरोपी को जम

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राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) जोधपुर की टीम ने बाड़मेर में कार्रवाई करते हुए कालूसिंह (38) पुत्र सोनसिंह निवासी मिथिड़िया तला, बाड़मेर को एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोपी बनाया था। आरोपी को 11 सितंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक अभिरक्षा में है।

बाड़मेर में DRI की 9 सितंबर 2024 को कार्रवाई

9 सितंबर 2024 को राजस्व आसूचना निदेशालय, जोधपुर की टीम मौके पर पहुंची, तो परिसर में ताला लगा हुआ था। कुछ देर बाद एक व्यक्ति वहां पहुंचा और जब उससे नाम पूछा तो उसने अपना नाम कालूसिंह राठौड़ बताया। उसने टीम को बताया कि यह जगह अर्जुनसिंह की है और इसे मनोहर बिश्नोई ने किराए पर ले रखा है। कालूसिंह यहां देखभाल करने के लिए नौकरी पर रखे होने की बात कही थी।

परिसर पर लगे ताले की चाबी के बारे में पूछने पर कालूसिंह ने बताया कि चाबी भी मनोहर बिश्नोई और उसके सहयोगी जगदीश बिश्नोई के पास रहती है। इसके बाद टीम द्वारा परिसर में ताला तोड़कर वहां से मादक पदार्थ से संबंधित काफी सामग्री की बरामदगी बताई गई।

FSL रिपोर्ट में नहीं हुई पुष्टि

मामले में जब एफएसएल रिपोर्ट मिली, तो रिपोर्ट का निर्णय नकारात्मक आया, यानी, जब्त पदार्थ मादक पदार्थ रहा हो, इसकी पुष्टि एफएसएल रिपोर्ट से नहीं हुई। कोर्ट ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना कि केवल देखरेख के लिए नौकरी पर रखे गए व्यक्ति को मादक पदार्थ या मादक पदार्थ बनाने हेतु सामग्री के संबंध में कोई जानकारी नहीं थी।

आरोपी के वकील जगदीश सिंह और धीरेंद्र सिंह ने कोर्ट में तर्क दिया कि जिस स्थान की राजस्व आसूचना निदेशालय के अधिकारियों द्वारा तलाशी ली गई थी, उस स्थान की केवल देखरेख के लिए कालूसिंह को नौकरी पर रखा गया था। मौका रिपोर्ट में भी यह तथ्य आया कि परिसर पर ताला लगा हुआ था और कुछ देर बाद जब प्रार्थी-अभियुक्त वहां पहुंचा था।

केस में मुख्य सहअभियुक्त मनोहर बिश्नोई और जगदीश बिश्नोई अभी भी फरार हैं। मामले में जांच पूरी होकर चार्जशीट प्रस्तुत की जा चुकी है। इसके निष्कर्ष में समय लगने की संभावना है।

कोर्ट का फैसला

जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रस्तुत तर्कों, अभिलेख पर उपलब्ध सामग्री, प्रकरण के तथ्यों और परिस्थितियों आदि का उल्लेख किया। इसमें कहा, यदि प्रार्थी-अभियुक्त राजस्व आसूचना निदेशालय, जोधपुर में दर्ज केस में ट्रायल कोर्ट में अपनी नियमित उपस्थिति के संबंध में एक लाख रुपये का मुचलका एवं 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें पेश कर तस्दीक करा दे, तो उसे इस मामले में जमानत पर तत्काल रिहा कर दिया जावे।



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