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श्रीहरिदेव जोशी जिला अस्पताल में डॉक्टर ने क्रिटिकल ऑपरेशन कर दो गर्भवती महिलाओं की जान बचाई।
मेडिकल कॉलेज डूंगरपुर के श्रीहरिदेव जोशी जिला अस्पताल में 2 गर्भवती महिलाओं को डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। दोनों गर्भवती महिलाओं में 5 ग्राम हीमोग्लोबिन के साथ कई तरह की गंभीर बीमारियां थी। एक महिला डेथ ऑन टेबल की हालत में अस्पताल में आई, लेकिन डॉक्
डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज में गायनिक यूनिट हेड एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गुणवंती मीणा ने बताया कि पहली महिला उर्मिला (37) पत्नी मणिलाल है। उर्मिला के पहले से 3 बेटियां हैं। वह 7 माह की गर्भवती थी। उसे अस्पताल में लाया गया तब उसकी हालत काफी खराब थी। महिला में 5 ग्राम हीमोग्लोबिन था। प्लेटलेट भी 30 हजार तक आ गई थी। उर्मिला के बच्चेदानी फट गई थी। बच्चा तिरछा ओर मरा हुआ था। इस वजह से उसकी हालत नाजुक थी।
डॉ. गुणवंती ने उसकी जांच कर इलाज शुरू किया। हिमोग्लोबिन कम होने से उसे 12 यूनिट ब्लड दिया गया, जिसमें 6 यूनिट लाल ओर 6 यूनिट (प्लेटलेट) सफेद ब्लड चढ़ाया। डॉ. गुणवती मीणा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रवि घोघरा की टीम ने महिला का क्रिटिकल ऑपरेशन करके फटी हुई बच्चेदानी को फिर से रिपेयर किया। महिला का महीनेभर तक इलाज चला, जिसके बाद उसकी हालत में सुधार हुआ। डॉ. गुणवती ने बताया कि महिला जब अस्पताल आई थी तब मरने के हालत में थी, लेकिन अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है।
अंगूर के गुच्छे की तरह प्रेग्नेंसी, हालत मरने जैसी, डॉक्टरों बचाया
डॉ. गुणवंती बताती है कि कोचरी निवासी रेशमा (24) पत्नी राजेश 4 माह की गर्भवती थी। उसकी प्रेग्नेंसी सबसे अलग तरह की थी। अंगूर के गुच्छे की तरह की प्रेग्नेंसी बहुत कम महिलाओं में होती है, जिसे मोलर प्रेग्नेंसी भी कहते है। इस तरह की प्रेग्नेंसी में बच्चे का विकास नहीं होता है। महिला के 10 दिन पहले ही गुजरात के एक अस्पताल में ऑपरेशन करवाया गया था, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। पैसा अधिक खर्च होने की वजह से परिजन उसे डूंगरपुर अस्पताल लेकर आए।
डॉ. गुणवंती ने उसकी जांच की। महिला को जब लाए तब वह डेथ ऑन टेबल की हालत में थी। महिला में सिर्फ 5 ग्राम खून था। उसे पीलिया, थायरॉइड ओर लिवर डिजीज की भी परेशानी थीं। सबसे बड़ी परेशानी अंगूर के गुच्छे की तरह की प्रेग्नेंसी थी। सबसे ज्यादा ब्लीडिंग की वजह से भी उसकी हालत नाजुक बनी हुई थी। महिला को 11 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। उसका दुबारा ऑपरेशन किया।
डॉ. गुणवंती मीणा के साथ ही डॉ. सतीश श्रीमाली, डॉ. प्रदीप मीणा, एनेस्थीसिया डॉ. सरोज ओर डॉ. रेखा रोत ने कई घंटों तक ऑपरेशन के बाद उसकी जिंदगी को फिर से बचाया। महिला अब पूरी तरह से स्वस्थ है। दोनों महिलाओं का डॉक्टर रेगुलर फॉलोअप ले रहे हैं।
डॉ. ने बताया कि इस तरह के प्राइवेट अस्पताल में ऑपरेशन पर 1 से 2 लाख रुपए का खर्च आता है, लेकिन यहां के डॉक्टरों ने बिना खर्च के दोनों महिलाओं को नई जिंदगी देने का काम किया है।
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