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राज्य के अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। अब आईसीयू और सीसीयू की ग्रेडिंग तय की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के तहत चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने इसके लिए प्रदेश स्तर पर कॉन्फ्रेंस कराने की तैयारी की है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत राज्य के अस्पतालों में आईसीयू और सीसीयू के लिए गाइडलाइन तैयार की जाएगी, ताकि मरीजों के भर्ती होने पर उपचार, डिस्चार्ज, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफिंग और मॉनिटरिंग की व्यवस्थाएं की जा सकें। इसके लिए राज्य स्तर पर एक कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का निर्णय किया गया है। इसके लिए एसएमएस कॉलेज प्रिंसिपल की अध्यक्षता में एक कोर कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में एसएमएस जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और एसपी मेडिकल कॉलेज के पीडिया, जनरल मेडिसिन तथा एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी को सदस्य बनाया गया है।
यह कमेटी कॉन्फ्रेंस के जरिए आईसीयू, सीसीयू मानकों पर प्रतिवेदन तैयार करेगी, जिसके तहत अस्पताल की क्षमता और रोगी भार के आधार पर आईसीयू, सीसीयू की ग्रेडिंग तय की जाएगी। बुनियादी ढांचे, रसद, स्वच्छता और सेवाओं की गुणवत्ता के लिए मानदंड स्थापित किए जाएंगे। डॉक्टरों, नर्सेज और पैरामेडिक्स के लिए योग्यता के मानक तय होंगे। सभी अस्पतालों में कार्यान्वयन के लिए आंतरिक ऑडिट प्रणाली सुनिश्चित की जाएगी। सरकारी के साथ ही निजी अस्पतालों को भी इस दायरे में शामिल किया गया है।
आईसीयू में गंभीर मरीजों की देखभाल नहीं होने की शिकायतें
सरकारी अस्पतालों के आईसीयू, सीसीयू में कई बार गंभीर मरीजों की केयर सही तरीके से नहीं हो पाती, जिसे लेकर शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंच जाती हैं। संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल के मेडिसिन आईसीयू में गर्मी के मौसम में एसी और मशीनें खराब होना आम बात है। ईबीजी जांच के लिए मरीज के परिजनों को चक्कर लगाने पड़ जाते हैं। आईसीयू में सुरक्षा मानकों में भी लापरवाही के कारण आग तक लग चुकी है। ऐसे में ग्रेडिंग और मॉनिटरिंग के मानक तय होने से मरीजों को उचित इलाज और अच्छी देखभाल हो सकेगी।
“आईसीयू की ग्रेडिंग के लिए जल्दी ही कॉन्फ्रेंस होगी। मानक तय होने से मरीजों को बेहतर केयर मिल सकेगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग से मंगलवार को ही पत्र आया है”
डॉ. गुंजन सोनी, प्रिंसिपल, एसपी मेडिकल कॉलेज
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