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राजस्थान सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सुमित गोदारा गुरुवार को चित्तौड़गढ़ जिले के दौरे पर रहे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि राज्य सरकार ने 1 नवंबर से “गिव अप कैंपेन” की शुरुआत की थी।

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चूंकि राजस्थान में इस योजना के तहत अधिकतम 4 करोड़ 46 लाख 19 हजार 960 लोगों को ही शामिल किया जा सकता है और जब यह सरकार बनी थी, तब यह सीमा पहले ही पूरी हो चुकी थी, इसलिए नए पात्र लाभार्थियों को जोड़ना संभव नहीं था। इसी वजह से “गिव अप” अभियान शुरू किया गया।

चित्तौड़गढ़ में अब तक का परिणाम

मंत्री ने बताया कि इस अभियान के तहत अब तक चित्तौड़गढ़ जिले में 56,883 लोगों ने स्वेच्छा से योजना से नाम हटवाया है। वहीं जिले में 12,378 नए लाभार्थी योजना से जोड़े गए हैं। इन नए लाभार्थियों में 4,867 लोग पहले से राशन कार्डधारी थे, 14,343 लोग साल 2022 में आवेदन करने वाले थे और 60,168 लोग साल 2025 में आवेदन करने वाले शामिल हैं। यह दिखाता है कि जिले में काफी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो पहले पात्र होते हुए भी योजना से वंचित थे और अब उन्हें लाभ मिलने लगा है।

राज्य स्तर पर “गिव अप” की स्थिति

राज्य स्तर पर देखें तो अब तक 28 लाख लोगों ने स्वेच्छा से योजना छोड़ दी है। इसके साथ ही एक ई-केवाईसी अभियान भी चलाया गया था, जिसमें यह नियम था कि अगर किसी ने 31 मार्च तक अंगूठा लगाकर अपनी पहचान की पुष्टि नहीं कराई, तो उसका नाम योजना से हटा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया में 27 लाख लोगों ने ई-केवाईसी नहीं कराई, जिससे उनका नाम अपने आप योजना से हट गया। इस तरह कुल मिलाकर करीब 55 लाख स्थान खाली हो गए, जो अब जरूरतमंदों को दिए जा रहे हैं।

नए लाभार्थियों को जोड़ने के लिए पोर्टल की शुरुआत

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 26 जनवरी को एक पोर्टल लॉन्च किया, ताकि खाली हुए स्थानों पर नए पात्र लाभार्थियों को योजना से जोड़ा जा सके। इस पोर्टल के जरिए अब तक 56 लाख 71 हजार 792 लोगों को योजना में जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा 16 लाख आवेदन अभी प्रक्रिया में हैं, जिनकी जांच चल रही है। सरकार “फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट” की नीति पर काम कर रही है, यानी जो पहले आवेदन करेगा, उसे पहले लाभ मिलेगा। इससे पारदर्शिता बनी रहती है।

राजस्थान की जनता दे रही है अपनी भागीदारी

इस पूरे अभियान को जनता का भी भरपूर सहयोग मिला है। मंत्री ने बताया कि राजस्थान की जनता ने “गिव अप” अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। हाल ही में एक दिन में 33,511 लोगों ने योजना से स्वेच्छा से नाम हटवाया, जो बहुत बड़ी संख्या है। यह दर्शाता है कि अब लोग अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझने लगे हैं और जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक है, वे खुद लाभ छोड़कर वंचितों के लिए जगह बना रहे हैं।

वंचितों को मिल रहे हैं कई लाभ

जो लोग अब इस योजना से जुड़े हैं, उन्हें सरकार की कई अहम योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इनमें प्रधानमंत्री गरीब जन कल्याण योजना के तहत 5 किलो गेहूं प्रति व्यक्ति, मुख्यमंत्री रसोई गैस सिलेंडर योजना के तहत साल में 12 सिलेंडर मात्र 450 रुपए में, मुख्यमंत्री आरोग्य आयुष्मान योजना के तहत नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा, और मुख्यमंत्री दुर्घटना सुरक्षा बीमा योजना के तहत 5 लाख रुपए तक का बीमा शामिल है। ये सभी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर रही हैं।

850 रुपए से आयुष्मान योजना में पंजीयन करना चाहिए

मंत्री सुमित गोदारा ने अपील की कि जिन लोगों के पास चारपहिया वाहन हैं या जो आयकर रिटर्न भरते हैं, वे स्वेच्छा से योजना का लाभ छोड़ें। इससे वे लोग जो अब भी वंचित हैं, उन्हें शामिल किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि जो लोग “गिव अप” कर रहे हैं, वे 850 रुपए देकर मुख्यमंत्री आरोग्य आयुष्मान योजना में निजी रूप से भी शामिल हो सकते हैं, ताकि उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती रहें।

नई राशन दुकानें खोलने की है योजना

राज्य सरकार नई राशन की दुकानें खोल रही है, ताकि योजना से जुड़े लोगों को राशन लेने में कोई दिक्कत न हो। जिन स्थानों पर दुकानें रिक्त हैं, वहां सितंबर तक उचित मूल्य दुकानदारों की नियुक्ति की जाएगी। इससे हर व्यक्ति को उसके नजदीक ही सुविधा मिलेगी और कोई भी योजना से वंचित नहीं रहेगा।

अब भी वंचित हैं कई लोग, चित्तौड़गढ़ अब भी पीछे

हालांकि काफी प्रगति हो चुकी है, लेकिन अब भी कई लोग योजना से बाहर हैं। चित्तौड़गढ़ जिले में वर्तमान में 3,647 आवेदन लंबित हैं। यदि इन्हें परिवार के हिसाब से चार से गुणा किया जाए, तो अनुमान है कि 15 से 16 हजार लोग अभी भी योजना से बाहर हैं। जैसे-जैसे लोग “गिव अप” कर रहे हैं, वैसे-वैसे नए लोगों को जोड़ा जा रहा है, जिससे यह संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है। लेकिन चित्तौड़गढ़ जिले की संख्या काफी पीछे है।

गरीबी में आई कमी और योजना की उपयोगिता

वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 11-12 वर्षों में लगभग 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं। इसका मतलब है कि देश में अब बहुत से लोग सक्षम हो चुके हैं और उन्हें सरकारी योजनाओं की आवश्यकता नहीं रह गई है। ऐसे में “गिव अप कैंपेन” एक समयानुकूल पहल साबित हो रही है। यह अभियान ना सिर्फ राज्य की गरीबी को कम कर रहा है, बल्कि सामाजिक संतुलन भी बना रहा है।

केवल पात्र और जरूरतमंदों को जोड़ा जाएगा

मंत्री सुमित गोदारा का यह 21वां जिला दौरा था। उन्होंने बताया कि जिलों में बैठकों और समीक्षा के बाद “गिव अप” अभियान को और तेजी मिली है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार जो 90 से 95 प्रतिशत नए लाभार्थी जुड़े हैं, वे वास्तव में पात्र और वंचित हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि केवल पात्र और जरूरतमंद लोगों को ही योजना में जोड़ा जाए, ताकि योजना का वास्तविक लाभ उन्हीं को मिले जिन्हें इसकी आवश्यकता है।



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