बाड़मेर जिले में 100 करोड़ की MD ड्रग्स की फैक्ट्री लगाने वाले मास्टरमाइंड कमलेश उर्फ कार्तिक को एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने पकड़ लिया है। आरोपी कॉर्पोरेट स्टाइल में ड्रग्स कारोबार चला रहा था।
उसने किसी को ऑपरेशन चीफ तो किसी को टेक्निकल और रिसर्च हेड बना रखा था। फाइनेंस, लॉजिस्टिक, रॉ मटेरियल और सिक्योरिटी का जिम्मा भी अलग-अलग लोगों को दे रखा था। वह खुद सेल्स और मार्केटिंग हेड था।
पुलिस को इनपुट मिला कि मास्टरमाइंड कमलेश बकाया हिसाब करने पार्टी से मिलने वाला है। जैसे ही वह रविवार सुबह जैसलमेर के सांगड़ एरिया में आया तो ATS और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने संयुक्त कार्रवाई कर उसे दबोच लिया।

2 साथी पहले ही पुलिस की गिरफ्त में आए ATS के IG विकास कुमार ने बताया- एमडी तस्करी के मास्टरमाइंड कमलेश उर्फ कार्तिक पुत्र सदराम निवासी धोरीमन्ना (बाड़मेर) को रविवार सुबह जैसलमेर के सांगड़ से पकड़ा गया है। जोधपुर के कुड़ी इलाके और बाड़मेर जिले के सेड़वा में एमडी फैक्ट्री पकड़ी गई थी, उसका सूत्रधार यही है।
कमलेश के साथी मांगीलाल और बिरजू पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि रमेश पर 1 लाख रुपए और राजू पर 40 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। इसके खिलाफ तीन अलग-अलग राज्यों में करीब 6 मामले चल रहे हैं।
पहले हथियार तस्करी करता था, फिर ड्रग्स का काम करने लगा उन्होंने बताया- कमलेश पहले मध्यप्रदेश के खरगौन इलाके से अवैध हथियार लेकर राजस्थान में सप्लाई करता था। इस दौरान मध्यप्रदेश में भी पकड़ा गया था। महाराष्ट्र के पुणे इलाके में मादक पदार्थ के साथ पकड़ा जा चुका है। पुणे की जेल में उसका संपर्क बिरजू शुक्ला से हुआ था।
कमलेश को MD ड्रग्स की लत लग गई थी। उसने इस काम में ज्यादा फायदा देखा तो यही काम शुरू कर दिया। राजस्थान में एमडी ड्रग्स का काम करते हुए रमेश और मांगीलाल को भी साथ ले लिया। कमलेश ने ही महाराष्ट्र में सभी गैंग सदस्यों को साथ बैठाकर बड़ी प्लानिंग की। राजू मांडा, रमेश और मांगीलाल साला-बहनोई है, जबकि कमलेश और सुरेश सगे भाई हैं।

मार्केटिंग हेड, रिसर्च एंड टेक्निकल पोस्ट भी बनाई एटीएस IG विकास कुमार ने बताया- कमलेश ने कॉर्पोरेट स्टाइल में गैंग तैयार की थी। गैंग में सभी की अलग-अलग भूमिका तय थी। रमेश को फाइनेंस के साथ कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दे रखी थी। मांगीलाल को फैक्ट्री हेड और बिरजू को टेक्निकल और रिसर्च हेड बनाया था। शिव को ऑपरेशन चीफ, राजू को रॉ मटेरियल और प्लांट हेड, गणपत को सिक्योरिटी की जिम्मेदारी दी थी।
मास्टरमाइंड कमलेश उर्फ कार्तिक खुद सेल्स और मार्केटिंग हेड था। इन लोगों ने मिलकर सबसे पहले जोधपुर के कुड़ी इलाके में एमडी की फैक्ट्री लगाई, लेकिन चालू होने के पहले ही फैक्ट्री पकड़ी गई। दूसरे प्रयास में बाड़मेर के सेड़वा इलाके में मांगीलाल के ठिकाने पर फैक्ट्री लगाई, लेकिन वह भी शुरू होने से पहले पकड़ी गई।
राजस्थान में हर महीने 20 करोड़ की MD सप्लाई की थी प्लानिंग ड्रग्स फैक्ट्री के लिए मशीन महाराष्ट्र और गुजरात से लाई जा रही थी, जबकि जरूरी केमिकल महाराष्ट्र के महाड़ इलाके से लाया जा रहा था। प्लानिंग के अनुसार बाड़मेर की फैक्ट्री में हर तीसरे-चौथे दिन 10 किलो एमडी ड्रग्स तैयार कर राजस्थान और उसके समीपवर्ती इलाकों में सप्लाई की जानी थी। हर महीने में करीब 20 करोड़ की एमडी तैयार कर पूरे राजस्थान में सप्लाई करने की प्लानिंग थी।

तस्वीर, 22 जुलाई की है। यहां बाड़मेर पुलिस ने सेड़वा इलाके में खेत में चल रही ड्रग फैक्ट्री पकड़ी थी। इसके बाद मांगीलाल और बिरजू को गिरफ्तार किया था।
कमलेश की विरोधी गैंग ने की ATS की मदद बाड़मेर और जैसलमेर के इलाके में एमडी का कारोबार करने वाली एक दूसरी गैंग भी थी, जिसकी कमलेश से बिल्कुल नहीं बनती थी। फैक्ट्री लगाने के लिए प्लानिंग तैयार होते ही विरोध गैंग ने सेल्स हेड का काम मांगा था, लेकिन जैसे ही उनको मालूम चला कि इसमें कमलेश शामिल है, तो हट गए।
विरोधी गैंग के एक सदस्य ने कमलेश को पकड़वाने में ATS की मदद की और उसके संभावित ठिकानों के बारे में बताते रहे। विरोध गैंग ने ही ATS टीम को सूचना दी कि कमलेश एमडी बेचने के पैसों का हिसाब-किताब करने जैसलमेर के सांगड़ थाना इलाके के कुड़ा गांव में आएगा। इस पर टीम ने दबिश देकर कमलेश को दबोच लिया। उसके पास 1 लाख से ज्यादा नकद रुपए मिले।
जैसलमेर में सूर्या होटल से कारोबार जानकारी के अनुसार, कमलेश सालों से जैसलमेर और बाड़मेर इलाके में एमडी ड्रग्स सप्लाई कर रहा था। इस काम में उसका भाई सुरेश भी उसके साथ रहता था। दोनों ने मिलकर जैसलमेर में एक होटल सूर्या भी खोल रखा था, जहां से इनका अवैध कारोबार संचालित होता था।

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