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मजदूरी का काम वाले कन्हैयालाल।
आर्थिक रूप से समृद्ध भामाशाह तो आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन राणावास गांव में अनूठा उदाहरण सामने आया। यहां जर्जर हो चुके सरकारी स्कूल के जीर्णोद्धार की मुहिम शुरू हुई तो कमठा मजदूर कन्हैयालाल भी आ गए। खुद के कच्ची छत है, लेकिन स्कूल के एक कमरे का जीर्
झालावाड़ जिले में जर्जर स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत के बाद राणावास स्कूल के स्टाफ ने भी स्कूल जीर्णोद्धार की अपील की। स्टाफ ने समाज के भामाशाहों से संपर्क किया। लिहाजा अब 8 कक्षा-कक्षों का जीर्णोद्धार चल रहा है। हर कक्षा पर 2.11 लाख खर्च किए जा रहे हैं। विद्यालय प्रधानाचार्य गुलाब राम हटेला ने बताया कि इससे पहले स्कूल की छत टपक रही थी।
दीवारों से प्लास्टर गिरा हुआ था। फर्श भी उखड़-खाबड़ हो चुके थे। आज की स्थिति में सीसीटीवी कैमरे, ओपन जिम, बेटियों के लिए पिंक टॉयलेट, स्टेज, बच्चों के लिए फर्नीचर, इनवर्टर सिस्टम, कंप्यूटर लैब, वाई-फाई और स्मार्ट क्लास में डिजिटल स्मार्ट टीवी स्क्रीन से पढ़ाई करवाई जा रही है।
स्कूल में कौन भामाशाह क्या योगदान कर रहा
विजयराज कटारिया परिवार राणावास हाल चेन्नई ने मुख्य गेट बनाने के लिए 7 लाख 77 हजार 77 रुपए घोषणा कर दी। भामाशाहों द्वारा सम्पूर्ण कक्षा में फर्नीचर व्यवस्था की गई। सभी कमरों में पंखे व में इनवर्टर की व्यवस्था की गई है। 12 कमरों को ठीक करने के लिए 50 लाख भामाशाहों द्वारा ही वहन किए जा रहे हैं। छत के लिए पोखर सीरवी ने 5 लाख का सहयोग किया। तीन फीट का फुटपाथ समाजसेवी हेमन्त जेसीबी राणावास बनवा रहे हैं।
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