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केन्द्र सरकार के जीएसटी कम करने के फैसले पर अशोक गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि इस देश में कांग्रेस कई सालों तक शासन में रही। लेकिन इन्होंने केवल गरीबी हटाने की बात की। गरीबी हटाने के लिए कुछ नहीं किया।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री रहे। केन्द्र में मंत्री रहे। लेकिन कभी भी इन्होंने लोगों को राहत देने का काम नहीं किया। इनके कार्यकाल में वैट 33 से 36 प्रतिशत तक पहुंच गया था। इन्होंने केवल शब्दों की लीपापोती करके लाभ लेने और लोगों को भ्रमित करने का काम किया।
सत्ता में आने के बाद बीजेपी की सरकार ने आमजन, मध्यम वर्ग और कमजोर वर्ग की चिंता करने का काम किया।
हमारे मन में देने की भावना है
जीएसटी स्लैब में कटौती करने में देरी के सवाल पर मदन राठौड़ ने कहा- देखिए हर चीज की समीक्षा करना जरूरी है। पीएम मोदी ने देश में व्यवस्था दी कि लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए और टैक्स देने की स्थिति में आए।
उससे सरकार का राजस्व बढ़ा। तब जाकर इस तरह का फैसला ले सकते हैं। हमारी जेब में देने के लिए सामान ही नहीं है। हम देने की बात करें तो कैसे दे सकते हैं। सरकार ने पहले आय बढ़ाई, राजस्व बढ़ाया और फिर देने का काम किया। इसलिए इतने साल लग गए।
हमारी देने की भावना है, मन में भाव हैं। विकास भी रुके नहीं, महंगाई दर को भी कंट्रोल किया जाए, जीडीपी भी बढ़ती जाए। सभी को ध्यान में रखकर यह निर्णय किया गया है।
इतना विलंब क्यों किया?
वैट कम करने के केन्द्र के फैसले पर गहलोत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके लिखा- नेता विपक्ष राहुल गांधी ने जीएसटी को लेकर जो बात 2016 में कही थी, अंततः 9 साल तक जनता को महंगाई का झटका देने के बाद 2025 में मोदी सरकार ने वो बात मान ली। इतना विलंब क्यों किया गया ?
अब इसे लेकर मोदी जी वाहवाही लूटना चाहते हैं, लेकिन राहुल गांधी के सुझाव को पहले ही मानकर इस फैसले को पहले ही ले लेते तो आमजन और अर्थव्यवस्था का इतना नुकसान न होता।
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