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डीडवाना के भाटीबास स्थित प्राचीन मां काली माता अखाड़ा मंदिर नवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

डीडवाना के भाटीबास स्थित प्राचीन मां काली माता अखाड़ा मंदिर नवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। करीब दो हजार वर्ष से अधिक प्राचीन यह सिद्ध शक्ति स्थल तंत्र साधना, योग और अद्भुत चमत्कारों का साक्षी माना जाता है। नाथ योगियों, ता

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मंदिर के इतिहास के अनुसार महायोगी गुरु गोरखनाथ और राजा भृर्तहरि ने भी इस स्थान पर साधना की थी। परंपराओं के मुताबिक योगी गोपीचंद और भृर्तहरि को मां काली की आदमकद प्रतिमा से प्रत्यक्ष संवाद का अनुभव हुआ था। मंदिर परिसर में आज भी वह पीपल का वृक्ष विद्यमान है, जहां ओधड़ संत बंजीराम ने जीवित समाधि ली थी।

मंदिर के प्रधान अर्चक सोहननाथ योगी ने बताया कि इस स्थान पर साबर साधना के अनेक प्रमाण आज भी मौजूद हैं। वर्ष 1992 के जीर्णोद्वार के समय मंदिर परिसर में भभूत और घृत का निकलना यहां के चमत्कारों में से एक है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस भभूती को शरीर पर लगाने से अनेक असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।

विशेषता यह है कि मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर मां को किसी प्रकार की पोषाक नहीं पहनाई जाती, जबकि वर्षभर में अन्य समय विशेष श्रृंगार किया जाता है। सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के समय भी मंदिर के पट बंद नहीं होते, बल्कि तंत्र साधना और विशेष हवन पूजन द्वारा सिद्धियां प्राप्त की जाती हैं।

इसी क्रम में महाकाली आदि योग स्किल पीठ परिसर में भी प्रतिदिन हवन पूजन का आयोजन हो रहा है। सोहननाथ योगी ने बताया कि हवन पूजन से शारीरिक-मानसिक कष्ट दूर होते हैं, वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

इस आयोजन में मुकेश गहलोत, लोकेश अग्रवाल, ओमप्रकाश भाटी, दिलीप तंवर, अभिषेक अग्रवाल, निर्वेश योगी, डूंगरमल टाक, राजू भाटी, आशाराम टाक, महेश भाटी, देवेंद्र भाटी, मनोज गहलोत, सुरेंद्र योगी और प्रवीण टाक सहित अनेक भक्तजन सहयोग कर रहे हैं।



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