चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर क्षेत्र के फलासिया गांव में शनिवार सुबह एक लेपर्ड का सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया। पिछले दो दिनों से गांव के एक फॉर्म हाउस में लेपर्ड को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया था। लेपर्ड वहां शिकार की तलाश में घूम रहा
फॉर्म हाउस में लगे सीसीटीवी कैमरे में नजर आया लेपर्ड
फलासिया गांव के एक व्यक्ति मगन मेघवाल ने वन विभाग को जानकारी दी थी कि इलाके में किसी जंगली जानवर की हलचल देखी जा रही है। इसके बाद वन विभाग की टीम ने जानवर की पहचान करने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में कोई भी जंगली जानवर नजर नहीं आया। बाद में गांव के धर्म सिंह के फार्म हाउस में लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच की गई, जिसमें लेपर्ड की तस्वीरें दिखाई दीं। इसके बाद 20 अगस्त को वहां एक पिंजरा लगाया गया, लेकिन पहले दो दिन लेपर्ड उसमें नहीं फंसा। शुक्रवार रात को लेपर्ड पिंजरे में घुस गया और शनिवार सुबह जब धर्म सिंह ने लेपर्ड को देखा, तो तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी।

शुक्रवार रात को पिंजरे में फंसा लेपर्ड।
सुरक्षित रेस्क्यू कर छोड़ा बस्सी सेंचुरी के जंगल में
सूचना मिलने के बाद नाका प्रभारी वनपाल ललित खटीक ने अपने वरिष्ठ अधिकारी डीएफओ (वन संरक्षक) राहुल झांझरिया को इसकी जानकारी दी। डीएफओ के निर्देश पर ललित खटीक और वनपाल नानालाल भील मौके पर पहुंचे और पिंजरे को मुख्यालय लाया गया। वहां से लेपर्ड का इलाज करवाकर उसे बस्सी सेंचुरी के आमझेरिया वन क्षेत्र ले जाया गया और सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया गया।

रेस्क्यू करने वाली टीम।
इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। इनमें सहायक वन संरक्षक यशवंत कंवर, रेंजर नरेंद्र विश्नोई, रामेश्वर लाल, नाथू सिंह, परमा राम और ललित सोलंकी भी मौजूद थे। इस तरह वन विभाग की टीम ने लेपर्ड को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पकड़ कर जंगल में पहुंचा दिया।
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