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अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ इकाई, राजकीय कृषि महाविद्यालय बाड़मेर के तत्वावधान में नीति से परिवर्तन तक: राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के पांच वर्ष विषय पर एक विचार-विमर्श व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. वीर सिंह भाटी रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 1986 के बाद भारत को यह पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति मिली है, जो लगभग तीन दशक बाद सामने आई। यह नीति केवल डिग्री-आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समग्र, बहुविषयक, कौशल आधारित एवं जीवनोपयोगी शिक्षा की ओर अग्रसर करती है।
डॉ. भाटी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा, बहुविषयक स्नातक पाठ्यक्रम, लचीलापन, मूल्यांकन में नवाचार, तकनीकी एकीकरण और शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुंच जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को समाहित किया गया है। उन्होंने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा और वैश्विक मानकों का संतुलित समावेश बताया।
कार्यक्रम की विषय प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए दीपक कुमार शर्मा ने कहा कि यह केवल एक रणनीतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि एक गतिशील दस्तावेज है, जो गुरु को पुन शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में स्थापित करता है। यह भारतीय युवा को विचार, व्यवहार और चिंतन में पूर्ण भारतीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के प्रभारी अधिकारी व जिला सचिव डॉ. खगेंद्र कुमार ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थी एवं संकाय सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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