☜ Click Here to Star Rating



झालावाड़ में दशलक्षण महापर्व के अवसर पर पंडित ज्ञाता सिंघई ने पंचबालयति स्वाध्याय भवन व चैत्यालय में व्याख्यान दिया।

झालावाड़ में दशलक्षण महापर्व के अवसर पर सिवनी से आए पंडित ज्ञाता सिंघई ने पंचबालयति स्वाध्याय भवन व चैत्यालय में व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि जब जीव को भेदज्ञान की प्राप्ति होती है, तब उसमें राग-द्वेष और कषाय उत्पन्न नहीं होते।

.

पंडित सिंघई ने समझाया कि जीव के दुखी होने का मूल कारण अज्ञान है। अज्ञान के कारण ही वह पदार्थों को अच्छा या बुरा मानता है। जब जीव को यह यथार्थ ज्ञान हो जाता है कि जगत का कोई भी पदार्थ अच्छा या बुरा नहीं है, तब कषाय उत्पन्न नहीं होती। यहीं से भेद विज्ञान का मार्ग शुरू होता है।

उन्होंने बताया कि वस्तु को छोड़ने पर भी अंदर जो राग रहता है, उसका फल मिलता है, न कि वस्तु छोड़ने का। ज्ञान का कार्य केवल जानना है। अज्ञान के कारण जीव जाने हुए पदार्थ में अच्छे-बुरे की कल्पना करता है और दुखी होता है।

मनीष शास्त्री के अनुसार, रात्रिकालीन प्रवचन के बाद धार्मिक ज्ञान पहेली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उत्साह से भाग लिया। छात्र-छात्राओं ने ज्ञान और वैराग्य वर्धक भजनों की सुंदर प्रस्तुतियां दीं।



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading