पाली में बुधवार को हेमावास बांध की पाल से फिर से पानी रिसाव तेज होने की सूचना पर सिंचाई विभाग के अधिकारी और किसान मौके पर पहुंचे और मिट्टी के कट्टों की एक और लेयर रखवाई।
पाली जिला मुख्यालय के निकट स्थित हेमावास बांध की पाल से पानी रिसाव की सूचना पर बुधवार को सिंचाई विभाग के अधिकारी और किसान मौके पर पहुंचे। जहां 15 दिन पहले पानी का रिसाव हो रहा था वही से पानी रिसाव कुछ तेजी हो रहा था। ऐसे में वहां मिट्टी के कट्टो की

पाली में बुधवार को हेमावास बांध की पाल से फिर से पानी रिसाव तेज होने की सूचना पर सिंचाई विभाग के अधिकारी और किसान मौके पर पहुंचे और मिट्टी के कट्टों की एक और लेयर रखवाई।
दरअसल बुधवार सुबह सिंचाई विभाग के अधिकारियों का सूचना मिली कि हेमावास बांध की दीवार में जहां पहले पानी का रिसाव हुआ था। वहां पानी का रिसाव तेज हो गया है। ऐसे में सिंचाई विभाग के अधिकारी और किसान नेता गिरधारी सिंह मंडली, त्रिभुवन सिंह, सुल्तान सिंह, कल्याण सिंह मंडली, कानाराम, दुर्गेश, शेषाराम, मुराद खान, हुकमाराम कीर सहित कई किसान मौके पर पहुंचे। सुरक्षा के लिहाल से जहां पानी का रिसाव हो रहा था। वहां मिट्टी के कट्टों की एक और लेयर लगाई गई।
14 गांवों में होती है पानी की सिंचाई जिले में जवाई बांध के बाद हेमावास प्रमुख बांध है। इसके पानी से पाली शहर सहित आस-पास के रामासिया, हेमावास, मंडली, मंडिया गिरादड़ा, गुलाबपुरा, रूपावास, मूलियावास, राऊबा की ढाणी, काणदरा, गुरलाई सहित करीब 14 गांवों में सिंचाई के लिए किसानों को पानी उपलब्ध करवाया जाता है। बांध की भराव क्षमता 28 फीट है। साथ ही पेयजल के लिए भी इस बांध में 500-600 MCFT (मिलियन क्यूबिक फीट) पानी रिजर्व रखा जाता है।
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