चित्तौड़गढ़ जिले में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां पूरे जोश से शुरू हो चुकी हैं। हर साल की तरह इस बार भी स्कूलों और सरकारी संस्थानों में 15 अगस्त को बच्चों के बीच लड्डू वितरण की योजना बनाई गई है। लड्डू बनाने का काम तेजी से चल रहा है। लेकिन इस बार एक ऐ
नगर सुधार न्यास (UIT) ने इस बार प्राइवेट स्कूलों को दिए जाने वाले लड्डुओं की संख्या में 25 प्रतिशत तक कटौती कर दी है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस कटौती की जानकारी किसी भी प्राइवेट स्कूल के संचालकों को अभी तक नहीं दी गई।
इस फैसले के बारे में अभी तक किसी को जानकारी नहीं है, जबकि लड्डू वितरण का काम कल यानी गुरुवार को किया जाएगा। ऐसे में जब स्कूल संचालकों को वास्तविक संख्या का पता चलेगा, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था करना बेहद मुश्किल होगा। यह भी सामने आया है कि कुछ स्कूलों में तो 30 प्रतिशत तक लड्डू कम दिए जा रहे हैं, जिससे कई बच्चों को लड्डू नहीं मिल पाएंगे।
चित्तौड़गढ़ में यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है कि सरकारी ही नहीं, बल्कि प्राइवेट स्कूलों के बच्चों को भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर लड्डू वितरित किए जाते हैं। जबकि राज्य के अन्य जिलों में यह योजना सिर्फ सरकारी स्कूलों के लिए ही सीमित रहती है।

चित्तौड़गढ़ में परंपरा है कि सरकारी के साथ प्राइवेट स्कूलों में भी लड्डूओं की सप्लाई की जाती है।
लड्डू बनाने वाले ठेकेदारों का कहना है कि पिछले साल प्राइवेट स्कूलों के लिए 32 क्विंटल लड्डू तैयार किए गए थे, लेकिन इस बार केवल 26 क्विंटल लड्डुओं की लिस्ट दी गई है। इसी तरह, सरकारी स्कूलों को मिलाकर पिछले साल कुल 42 क्विंटल लड्डू तैयार हुए थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा घटकर 35 क्विंटल रह गया है।
133 प्राइवेट स्कूलों को 25,924 लड्डू पैकेट और 27 सरकारी स्कूलों को 5,700 पैकेट बंटेंगे इस बार कुल 34,569 लड्डू पैकेट बांटे जाएंगे। इनमें से 133 प्राइवेट स्कूलों को 25,924 पैकेट, 27 सरकारी स्कूलों को 5,700 पैकेट, और 83 आंगनबाड़ी केंद्रों को 1,700 पैकेट मिलेंगे। इसके अलावा, जिला रसद विभाग के लिए 500 पैकेट, जिला जेल में 650 पैकेट, और किशोर गृह में 95 पैकेट भेजे जाएंगे। लड्डू बनाने के लिए इस बार करीब 8.50 क्विंटल बेसन, 720 किलो घी, और 18 क्विंटल चीनी की आवश्यकता होगी।
UIT के एक अधिकारी ने बताया कि हाल ही हुई UIT की एक बैठक में निर्णय लिया गया था कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा की जाने वाली लड्डुओं की मांग को 25 प्रतिशत तक घटाया जाएगा। उनका तर्क यह था कि अक्सर प्राइवेट स्कूलों में 15 अगस्त को बच्चों की उपस्थिति बहुत कम रहती है, लेकिन इसके बावजूद स्कूल ज्यादा मात्रा में लड्डुओं की डिमांड कर देते हैं। इसी आधार पर उन्होंने यह मान लिया कि इस बार भी प्राइवेट स्कूलों में बच्चे नहीं आएंगे, और लड्डुओं की मांग वास्तविक संख्या से ज्यादा होगी।
हालांकि जब UIT के सचिव कैलाश गुर्जर से इस संबंध में संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

स्कूलों में लड्डूओं की सप्लाई की लिए बड़े स्तर पर तैयारी की जाती है।
जिला शिक्षा अधिकारी बोले- स्कूलों की तरफ से कोई ओवर डिमांड नहीं जिला शिक्षा अधिकारी(डीईओ) राजेंद्र शर्मा का कहना है कि हर स्कूल का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध है और बच्चों की संख्या की जानकारी UIT को आधिकारिक रूप से दी गई थी। ऐसे में यदि कोई स्कूल झूठी मांग करता तो वह डेटा में साफ नजर आता। इसका सीधा मतलब है कि स्कूलों की तरफ से किसी भी प्रकार की ओवर डिमांड नहीं की गई थी।
हालांकि मामले में पूछताछ करने पर एक निजी स्कूल संचालक ने बताया कि जब स्कूलों ने बच्चों की वास्तविक संख्या के आधार पर ही लड्डू की मांग की थी, तो फिर बिना सूचना दिए कटौती क्यों की गई? यह फैसला न केवल बच्चों के साथ अन्याय है, बल्कि उन स्कूलों के लिए भी कठिनाई खड़ी कर देता है जो पहले से अपने प्रोग्राम की योजना बना चुके हैं। लड्डू वितरण जैसे छोटे, लेकिन संवेदनशील काम में पारदर्शिता और समय पर सूचना बहुत जरूरी होती है।
15 अगस्त जैसा राष्ट्रीय पर्व बच्चों के लिए गर्व और खुशी का अवसर होता है। उस दिन स्कूलों में झंडारोहण, देशभक्ति गीत और मिठाइयों के वितरण के जरिए बच्चों को देश के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का एहसास कराया जाता है। ऐसे मौके पर यदि कुछ बच्चों को लड्डू न मिलें या भेदभाव महसूस हो, तो यह न केवल उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है।
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