किरोड़ीलाल मीणा ने डिग्री फर्जीवाड़े को लेकर कहा कि ये डिग्रियां केवल गड्डी हैं, इनकी कोई मान्यता नहीं है।
चित्तौड़गढ़ की मेवाड़ यूनिवसिर्टी फिर से सुर्खियों में है। मंगलवार (29 जुलाई) को कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने यूनिवर्सिटी का दौरा किया।
उन्होंने यहां फर्जी डिग्री को लेकर बात करते हुए जांच एजेंसी एसओजी पर भी सवाल उठाए। मंत्री ने कहा कि- SOG की टीम सिर्फ एक बार आई और चली गई, लेकिन फर्जी डिग्रियों का खेल अब भी जारी है। ये अब नहीं चलेगा।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है। दरअसल, पिछले साल एसओजी ने यूनिवर्सिटी के डीन कौशल किशोर चंदरुल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद भी यूनिवर्सिटी में पैसे लेकर डिग्रियां बांटने का आरोप है।

कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा मंगलवार 29 जुलाई को दोपहर करीब 12 बजे अचानक मेवाड़ यूनिवर्सिटी पहुंचे, जिससे हड़कंप मच गया।
कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने क्या कहा…

SOG की टीम सिर्फ एक बार आई और चली गई, SOG के एडिशनल डीजी मेरी बात सुन रहे हैं, तो वे जान लें कि यह तमाशा अब और नहीं चलेगा। अधूरी जांच छोड़कर चले जाना सही नहीं है। अब इस मामले में आगे की जांच हमारा विभाग करेगा।

स्टूडेंट ने की थी कृषि मंत्री किरोड़ीलाल से शिकायत
मेवाड़ यूनिवर्सिटी के घोटाले की परतें तब और खुली जब मंत्री के पास बीकानेर के स्वतंत्र विश्नोई नाम के एक छात्र ने शिकायत दर्ज करवाई। स्वतंत्र ने बताया कि वह कॉमर्स स्ट्रीम से 12वीं पास है।
लेकिन एक दलाल ने उससे वादा किया कि वह उसे एग्रीकल्चर डिप्लोमा का प्रमाण पत्र दिलवा देगा। इसके लिए उसने 50 हजार रुपए लिए। जब स्वतंत्र को प्रमाण पत्र दिया गया, तो उस पर लिखा था कि उसने 66 प्रतिशत अंकों से पास किया है।

बीकानेर के स्वतंत्र विश्नोई ने बताया कि यहां ऑनलाइन या ऑफलाइन पढ़ाई नहीं हुई। डायरेक्ट एग्जाम के लिए बुलाया।
एग्जाम की कॉपियों में थे नाममात्र के नंबर
मंत्री ने जब उसकी एग्जाम की कापियां देखीं तो हैरान रह गए। चारों पेपर परीक्षार्थी के सामने ही जांचे गए थे और उनमें नाम मात्र के ही अंक थे। खास बात यह रही कि कॉपियों में कहीं भी परीक्षक के हस्ताक्षर नहीं थे।
जिससे यह स्पष्ट हो गया कि पूरा खेल यूनिवर्सिटी और दलालों की मिलीभगत से चल रहा है। यह जानकारी भी सामने आई की मेवाड़ यूनिवर्सिटी के लिए राजस्थान के हर जिले में दलाल सक्रिय हैं।
ये दलाल बेरोजगार युवाओं से संपर्क करते हैं और उन्हें बिना पढ़े-लिखे सीधे डिग्री दिलवाने का लालच देते हैं। आरोप है कि यूनिवर्सिटी की डिग्रियों का इस्तेमाल सरकारी नौकरी में भी किया जा रहा है।

पिछले साल भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई, जांच आगे नहीं बढ़ी
साल 2024 में अप्रैल के महीने में SOG ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी में छापेमारी की गई थी। जांच में सामने आया कि उन्होंने गंगरार और नोएडा स्थित यूनिवर्सिटी कैंपस में सैकड़ों विद्यार्थियों को मोटी रकम लेकर फर्जी डिग्रियां बांटी थी।
इस दौरान राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की हिंदी लेक्चरर भर्ती 2022 में फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी पाने वाली सांचौर निवासी कमला विश्नोई और ब्रह्मा कुमारी को भी SOG ने गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में डीन कौशल किशोर ने कबूल किया था कि पिछले 5 सालों में उन्होंने ऐसे सैकड़ों फर्जी प्रमाणपत्र बांटे हैं।
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कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा मंगलवार को अचानक चित्तौड़गढ़ के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी पहुंचे। उन्हें एग्रीकल्चर डिप्लोमा और डिग्री को लेकर फर्जीवाड़े की शिकायत मिली थी। (पढ़ें पूरी खबर)
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