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साइबर ठगों के खिलाफ पुलिस ऑपरेशन संग्राम चला रही है। अपराधियों ने इसमें भी क्राइम का पैंतरा खोज लिया। वे पुलिसकर्मी बनकर गांवों से लोगों को उठाते हैं। उन्हें साइबर ठगी में फंसाने की धमकी देकर फिरौती वसूल लेते हैं। बदमाश पुलिस की बत्ती लगी बोलेरो गाड़
बदमाशों ने गोविंदगढ़ (अलवर) के सैमला खुर्द में बिघोत ई-मित्र की दुकान से 3 माह पहले संचालक वसीम अकरम व उसके दिव्यांग भाई साजिद को अगवा कर 4 लाख फिरौती ली थी। कोर्ट के दखल से 23 सितंबर को गोविंदगढ़ थाने के एक कांस्टेबल, सीकरी व पहाड़ी थाने के लांगरी सहित 7 लोगों पर केस भी दर्ज हुआ, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। भास्कर ने पैरेलल इन्वेस्टिगेशन किया तो चौंकाने वाला सच सामने आया।
भास्कर रिपोर्टर ने पैरेलल इन्वेस्टिगेशन कर 135 किमी दूर नकली पुलिस का टॉर्चर रूम खोजा
भास्कर सबसे पहले पीड़ितों तक पहुंचा। वे डरे-सहमे मिले। बोले— धमकियां मिल रही हैं, इसलिए किसी को कुछ नहीं बताते। हमने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज, बदमाशों के नाम सब दे दिए, मगर कुछ कार्रवाई नहीं हुई। रिपोर्टर उनके साथ अलवर से करीब 135 किमी दूर कनवाड़ा में बनाए टॉर्चर रूम पहुंचा, जहां खतरनाक नस्ल के कुत्तों के साथ पहरा देता युवक मिला। युवक ने रिपोर्टर को धमकाते हुए वहां से चले जाने को कहा।
गांव में पूछा तो लोगों ने बताया कि यहां आए दिन पुलिस की गाड़ी में लोगों को लाते हैं, मारपीट की आवाजें आती हैं। यहां से रिपोर्टर अपहर्ता का रूट ट्रैक करते हुए यूपी के बरसाना, हरियाणा के झज्जर और फर्रूखनगर में उन जगहों पर पहुंचा, जहां बदमाश पीड़ितों को लेकर गए। वहां सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिनमें बदमाशों के चेहरे, वाहन नंबर आदि सब मिल गए। पुलिस अब तक इन जगहों पर नहीं पहुंची है, न कार्रवाई की।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से मना किया, कोर्ट की दखल पर केस दर्ज
पीड़ित ई-मित्र संचालक वसीम अकरम पुत्र उस्मान खान व उसके चचेरे भाई साजिद निवासी धांधोली थाना जालूकी (डीग) की रिपोर्ट के अनुसार, 23 जून को गोविंदगढ़ थाने का सिपाही राजवीर ई-मित्र पर आया। बोला— “तुम दो नंबर का काम करते हो, कल थाने आना।” जब उन्होंने अगले दिन संपर्क किया तो बोला— “मैं छुट्टी पर हूं।”
इसके बाद 28 जून को ई-मित्र पर लाल बत्ती लगी बोलेरो में 7 लोग पहुंचे। खुद को पुलिसकर्मी बता उन्होंने दुकान से कंप्यूटर आदि तथा 80 हजार रुपए गाड़ी में पटक लिए। वसीम और साजिद को साथ ले गए। परिजन गोविंदगढ़ थाने पहुंचे तो पता चला कि उन्होंने किसी को नहीं पकड़ा। इसी दौरान साजिद के नंबर से परिजनों के पास फोन आया, जिसमें बदमाशों ने उन्हें मामला हरियाणा पुलिस का बता मानेसर साइबर थाने बुलाया। परिजन मानेसर थाना पहुंचे तो वहां भी पुलिस ने अपनी कार्रवाई से इनकार किया।
उधर, बदमाश दोनों को कनवाड़ा में बने टॉर्चर रूम ले गए। रास्ते भर पीटते रहे। टॉर्चर रूम पर दोनों को गाड़ी में पटक रखा। दो लोग पहरा देते रहे। अगली सुबह 4 बजे दोनों को यूपी के बरसाना ले गए। रास्ते में 4 बदमाश गाड़ी से उतर गए। बाकी लोग उन्हें झज्जर और वहां से फर्रूखनगर ले गए।
इसी दौरान साजिद उर्फ काला पुत्र इन्नस निवासी हुसैपुर थाना सीकरी ने पीड़ित के भाई को फोन कर कहा कि 5 लाख रुपए की फिरौती की डिमांड आई है। उधर, गांव में असलूप ने भी साजिद काला के ज़रिए 5 लाख रुपए में युवकों को छुड़ाने की गारंटी दी। परिजनों ने 4 लाख रुपए में सौदा किया और साजिद काला के घर 2.50 लाख रुपए पहुंचा दिए। शेष 1.50 लाख रुपए अन्य जगह दिए।
29 जून को वसीम और साजिद को बदमाशों ने हुसैपुर में छोड़ दिया। इसके बाद पीड़ित गोविंदगढ़ थाने पहुंचे थे। वहां सुनवाई नहीं हुई तो 8 जुलाई को तत्कालीन अलवर एसपी संजीव नैन से मिले। इस संबंध में गोविंदगढ़ थाना प्रभारी बने सिंह ने बताया कि पुलिस पर पीड़ित झूठे आरोप लगा रहे हैं। सिपाही तो घटना के दिन जम्मू-कश्मीर में था।
“फर्जी पुलिस बनकर अपहरण वालों को चिन्हित कर लिया है। पुलिस मेरिट से केस का अनुसंधान और कार्रवाई कर रही है। जल्द सभी अपराधी पकड़कर गैंग का खुलासा करेंगे। जांच में कांस्टेबल की भूमिका सामने नहीं आई है।”
— सुधीर चौधरी, एसपी, अलवर
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