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भाद्रपद कृष्ण तृतीया मंगलवार 12 अगस्त 2025 को कज्जली तीज मनाई जाएगी।
भाद्रपद कृष्ण तृतीया मंगलवार 12 अगस्त 2025 को कज्जली तीज मनाई जाएगी। इसे स्थानीय भाषा में काजल की तीज, नीमड़ी तीज, बड़ी तीज या सातुड़ी तीज भी कहा जाता है।
ज्योतिष एवं वास्तुविद आचार्य प्रदीपकुमार दवे के अनुसार इस दिन चंद्र दर्शन रात्रि 9:17 बजे होगा। वृहद शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने पूरे श्रावण मास ‘पार्वतेश्वर’ का पूजन किया था।
पूजन विधि में मां पार्वती प्रतिदिन तालाब से मिट्टी लाकर शिवलिंग बनाती थीं। फिर उस पर गंगाजल से रुद्राभिषेक कर राजोपचार पूजन करती थीं। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इसी दिन पार्वती को अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।
पार्वती ने प्रसन्नता में अपनी सभी सहेलियों को सत्तु के लड्डू खिलाकर मुंह मीठा करवाया था। इसी मान्यता के साथ आज भी कज्जली तीज पर सौभाग्यवती महिलाएं अपना दांपत्य जीवन अखंड रखने के लिए व्रत रखती हैं।
कुंवारी कन्याएं शिव समान वर प्राप्ति के लिए उपवास रखकर भगवान शिव-पार्वती का पूजन करती हैं। रात्रि में चंद्रशेखर (महादेव) के दर्शन के बाद महिलाएं भगवान को सत्तु का भोग लगाकर अपना उपवास खोलती हैं।
फिर सत्तु का प्रसाद अपनी सहेलियों में बांटती हैं। इस व्रत का महत्व विवाहित महिलाओं के लिए सुखी दांपत्य जीवन और कुंवारी कन्याओं के लिए अच्छे वर की प्राप्ति से जुड़ा है।
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