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राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश मुकेश राजपुरोहित ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई टेक्नोलॉजी के फायदे हैं, तो इसके नुकसान भी हैं। एक सर्वे में बताया गया है कि हमें एआई टेक्नोलॉजी का उपयोग मानव सुपरविजन में विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए। उन्ह

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वे शनिवार को बालोतरा जिला मुख्यालय पर स्थित लाल बाग रिसोर्ट में अधिवक्ता परिषद जोधपुर प्रांत की ओर से आयोजित बैठक के अंतिम सत्र में संबोधित कर रहे थे। ‘‘दी डबल एजड स्वोर्डः एआई‘स इम्पैक्ट ऑन दी लीगल सिस्टम‘‘ विषय पर आयोजित व्याख्यान में जस्टिस राजपुरोहित बतौर मुख्य वक्ता शामिल हुए।

राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश मुकेश राजपुरोहित ने कानूनी व्यवस्था में एआई के असर पर विषय पर संबोधित किया।

राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश मुकेश राजपुरोहित ने कानूनी व्यवस्था में एआई के असर पर विषय पर संबोधित किया।

एआई टेक्नोलॉजी ने काम को सरल किया-जस्टिस राजपुरोहित

जस्टिस राजपुरोहित ने कहा कि एआई टेक्नोलॉजी ने काम को काफी सरल बना दिया है। इससे घंटों का काम मिनटों में हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट में सुहास एप का उपयोग किया जाता है। एआई तकनीक के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्णयों का विभिन्न भाषाओं में आसानी से अनुवाद हो रहा है।

कोर्ट धीरे-धीरे हो रहा पेपरलेस

उन्होंने कहा कि कोर्ट को धीरे-धीरे पेपरलेस करने की दिशा में काम किया जा रहा है। एआई तकनीक से नई पीढ़ी तो वाकिफ और अभ्यस्त है, लेकिन पुराने लोगों को अब भी इसमें दिक्कत आ रही है। उन्होंने अधिवक्ताओं को समय के साथ तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए खुद को बदलने की भी सलाह दी। जस्टिस राजपुरोहित ने एआई के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

दूसरे सत्र में इन्होंने लिया हिस्सा

दूसरे सत्र में कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एमबी नरगुण्ड, अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय मंत्री अधिवक्ता संजय देशपांडे, राष्ट्रीय महामंत्री डी. भरत कुमार, पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता केएल ठाकुर, हरियाणा के पूर्व महाधिवक्ता बलदेवराज महाजन और अधिवक्ता परिषद के जोधपुर प्रांत महामंत्री श्याम पालीवाल मौजूद थे। इनके अलावा जालोर जिले से दिलीप शर्मा, ललित खत्री, अश्विन राजपुरोहित, प्रवीण घांची, रणजीत भट्ट, डूंगर देवासी, अशोक कुमार सुथार, जगदीश प्रजापत ने भाग लिया।

बैठक में मौजूद अधिवक्ता।

बैठक में मौजूद अधिवक्ता।

राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारियों पर चर्चा की

इधर, दिसंबर में जोधपुर प्रांत की मेजबानी में होनी वाली अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता के. श्रीनिवास मूर्ति और उत्तर क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्रीहरि राव बोरीकर की मौजूदगी में बैठक आयोजित की गई।

बैठक के पहले सत्र में परिषद के जोधपुर प्रांत महामंत्री श्याम पालीवाल ने अधिवेशन की जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा करते हुए कहा कि अधिवेशन सभी के सामूहिक प्रयासों से सफल होगा। इसके लिए एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने वित्त, आवास, ट्रांसपोर्ट, डाटा कलेक्शन, फ्लैक्स बैनर, रजिस्ट्रेशन, भोजन, प्रेस एवं मीडिया सहित विभिन्न कमेटियों के प्रमुख कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी। इस दौरान प्रत्येक जिले की इकाइयों को एक प्रपत्र भी दिया, जिसमें उनके क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के अलग-अलग नाम मांगे गए।

कमेटियों बनाकर बैठक ली

बैठक में राजस्थान उच्च न्यायालय में अतिरिक्त महाधिवक्ता श्यामसुंदर लदरेचा, राजेश पंवार एवं बाड़मेर के अधिवक्ता अमृत जैन ने भी अपनी बात रखी। कार्यकर्ताओं के नाम फाइनल करने के बाद सभी कमेटियों की अलग-अलग बैठक भी ली गई। साथ ही काम करने की रुपरेखा को अंतिम रूप दिया गया।

पूरे भारत के लिए दिशा देने वाला बनें अधिवेशन-बोरीकर

बैठक के दूसरे सत्र में परिषद के उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री श्रीहरि राव बोरीकर ने कहा कि जोधपुर प्रांत की मेजबानी में होने वाला राष्ट्रीय अधिवेशन एक माइल स्टोन साबित होना चाहिए। इस अधिवेशन में नवाचारों पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में हुए अधिवेशन का उदाहरण देते हुए अधिवेशन को प्लास्टिक मुक्त रखने की सलाह दी। साथ ही भोजन की बर्बादी रोकने के लिए भी व्यवस्था का आग्रह किया। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष के श्रीनिवास मूर्ति एवं राष्ट्रीय महामंत्री डी. भरत कुमार ने अपने अनुभव साझा किए और अधिवेशन को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए।

कार्यक्रम में जोधपुर महानगर इकाई के अध्यक्ष पी.एस. चूण्डावत, महामंत्री देवकीनंदन व्यास, अतिरिक्त महाधिवक्ता नाथू सिंह राठौड़, नरेन्द्र सिंह राजपुरोहित सहित जालोर, सिरोही, पाली, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, डीडवाना, फलोदी, बीकानेर, श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ सहित जोधपुर प्रांत के सभी जिलों से बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे



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